नई दिल्ली। देश में ड्राइविंग लाइसेंस (डीएल) जारी करने की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए केंद्र सरकार ने नए नियमों का मसौदा जारी किया है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के प्रस्ताव के अनुसार, भारतीय नागरिकों और विदेशी नागरिकों के ड्राइविंग लाइसेंस के प्रारूप और रंग अलग-अलग होंगे। इसके साथ ही लाइसेंस बनवाने की प्रक्रिया, ऑनलाइन परीक्षा और जरूरी दस्तावेजों से जुड़े नियमों में भी बदलाव प्रस्तावित हैं।
मंत्रालय ने 16 अक्टूबर 2026 को केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 में संशोधन का मसौदा प्रकाशित किया। इस पर आम लोगों से 30 दिनों के भीतर सुझाव और आपत्तियां मांगी गई हैं। ये बदलाव अभी प्रस्तावित हैं, अंतिम रूप से लागू नहीं हुए हैं।
सेफ ड्राइविंग टेस्ट में 75 प्रतिशत अंक जरूरी
प्रस्ताव के अनुसार, सुरक्षित ड्राइविंग से जुड़े ऑनलाइन ट्यूटोरियल की अवधि कम से कम 30 मिनट होगी। इसके बाद होने वाले आकलन में उत्तीर्ण होने के लिए न्यूनतम अंक 60 प्रतिशत से बढ़ाकर 75 प्रतिशत करने का प्रस्ताव है। ट्यूटोरियल पूरा करने की समयसीमा भी सात दिन से बढ़ाकर 15 दिन करने की तैयारी है।
दस्तावेजों के नियम होंगे सख्त
ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के लिए पहचान, उम्र और पते के प्रमाण से जुड़े दस्तावेजों की सूची में बदलाव प्रस्तावित है। इनमें आधार कार्ड, पासपोर्ट, मतदाता पहचान पत्र, जन्म प्रमाणपत्र, स्कूल की अंकतालिका और निर्धारित अवधि के बिजली या गैस बिल जैसे दस्तावेज शामिल हैं। विदेशी नागरिकों को भारत में कानूनी रूप से रहने का प्रमाण भी देना होगा।
मसौदे में सामान्य हलफनामे के आधार पर उम्र और पते की पुष्टि की व्यवस्था हटाने का प्रस्ताव भी है, ताकि गलत जानकारी देकर लाइसेंस बनवाने की आशंका कम की जा सके।
ऑनलाइन सेवाओं में मिलेगी सुविधा
लाइसेंस में नाम और पते जैसी जानकारियां बदलने के लिए ऑनलाइन आवेदन की व्यवस्था प्रस्तावित है। संबंधित अधिकारी को आवेदन पर 15 दिनों के भीतर निर्णय लेना होगा। पते में बदलाव के आवेदन पर 30 दिनों तक निर्णय नहीं होने की स्थिति में उसे स्वीकृत माना जाएगा।
इसके अलावा, आधार आधारित ऑनलाइन प्रमाणीकरण के माध्यम से कुछ लाइसेंस सेवाओं के शुल्क में छूट देने का भी प्रस्ताव है।
क्यूआर कोड से मिलेगी अधिक जानकारी
नए प्रारूप के तहत ड्राइविंग लाइसेंस पर क्यूआर कोड की व्यवस्था और कार्ड के मानकों में बदलाव प्रस्तावित है। इसमें लाइसेंस धारक से जुड़ी अतिरिक्त जानकारी दर्ज की जा सकेगी।
मंत्रालय के अनुसार, इन प्रस्तावित बदलावों का उद्देश्य फर्जी दस्तावेजों पर रोक लगाना, सड़क सुरक्षा को मजबूत करना और लाइसेंस संबंधी सेवाओं को अधिक सुविधाजनक बनाना है।





