वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की नई टैरिफ नीति के खिलाफ देश के 25 राज्यों ने कानूनी मोर्चा खोल दिया है। राज्यों ने आरोप लगाया है कि प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसले के बाद भी नए आयात शुल्क लागू कर अपने अधिकारों का दायरा बढ़ाया है। मामले को लेकर अमेरिकी व्यापार अदालत में चुनौती दी गई है।
डेमोक्रेटिक पार्टी शासित राज्यों की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि ट्रंप प्रशासन के नए टैरिफ पहले रद्द किए गए शुल्कों को दूसरे कानूनी प्रावधानों के जरिए फिर लागू करने की कोशिश हैं। राज्यों का दावा है कि राष्ट्रपति को इस तरह व्यापक स्तर पर आयात शुल्क लगाने का अधिकार नहीं है।
मामला उस समय सामने आया है जब अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप प्रशासन द्वारा पहले लगाए गए व्यापक टैरिफ को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर फैसला देते हुए कुछ शुल्कों को अवैध ठहराया था। इसके बाद प्रशासन ने नई कानूनी व्यवस्था का सहारा लेते हुए नए टैरिफ लागू किए।
नई नीति के तहत करीब 60 व्यापारिक साझेदारों और यूरोपीय संघ से आने वाले सामानों पर 10 से 12.5 प्रतिशत तक शुल्क लगाया गया है। प्रशासन का कहना है कि यह कदम जबरन श्रम से जुड़े उत्पादों और अनुचित व्यापार गतिविधियों से निपटने के लिए उठाया गया है।
विरोध करने वाले राज्यों का तर्क है कि टैरिफ का असर सीधे उपभोक्ताओं, कारोबारियों और राज्य अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। उनका कहना है कि ऐसे फैसलों के लिए कांग्रेस की भूमिका जरूरी है और कार्यपालिका को अपनी शक्तियों की सीमा में रहना चाहिए।
वहीं, ट्रंप प्रशासन ने नई टैरिफ व्यवस्था को कानूनी रूप से सही बताया है। सरकार का कहना है कि व्यापार नियमों के उल्लंघन और आपूर्ति श्रृंखला से जुड़ी समस्याओं से निपटने के लिए यह कदम आवश्यक है।
टैरिफ को लेकर जारी यह कानूनी लड़ाई अमेरिकी व्यापार नीति और राष्ट्रपति के अधिकारों पर एक बड़ी बहस बन गई है। आने वाले समय में अदालत का फैसला यह तय कर सकता है कि प्रशासन की नई शुल्क व्यवस्था कितनी मजबूत कानूनी आधार पर टिकी है।





