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ट्रंप के फैसले से इंडो-पैसिफिक रणनीति पर सवाल, क्वाड के भविष्य को लेकर बढ़ी चिंता

वॉशिंगटन/नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए ‘इंडो-पैसिफिक कमांड’ का नाम बदलकर फिर से ‘पैसिफिक कमांड’ कर दिया है। इस कदम के बाद भारत की रणनीतिक भूमिका और क्वाड समूह के भविष्य को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।

दरअसल, वर्ष 2018 में अमेरिका ने अपने सैन्य कमान का नाम बदलकर ‘यूएस इंडो-पैसिफिक कमांड’ किया था। इसका उद्देश्य हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की बढ़ती भूमिका को मान्यता देना और क्षेत्रीय सहयोग को मजबूत करना माना गया था। अब ट्रंप प्रशासन द्वारा पुराने नाम को बहाल किए जाने को कई विशेषज्ञ बड़े रणनीतिक संकेत के रूप में देख रहे हैं।

राजनीतिक और रणनीतिक हलकों में इस फैसले को लेकर चिंता जताई जा रही है। आलोचकों का कहना है कि इससे अमेरिका की हिंद-प्रशांत नीति में बदलाव का संदेश जा सकता है। उनका मानना है कि यदि इंडो-पैसिफिक अवधारणा को कमजोर किया जाता है तो भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के समूह क्वाड की प्रासंगिकता पर भी असर पड़ सकता है।

हालांकि अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि नाम परिवर्तन का अर्थ क्षेत्रीय सहयोग या भारत के साथ रणनीतिक संबंधों में किसी तरह की कमी नहीं है। अधिकारियों के अनुसार, हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा और साझेदारी से जुड़ी अमेरिकी प्रतिबद्धताएं पहले की तरह जारी रहेंगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के वर्षों में क्वाड ने क्षेत्रीय सुरक्षा, समुद्री सहयोग और आपूर्ति श्रृंखला जैसे मुद्दों पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। ऐसे में अमेरिका के इस फैसले पर सदस्य देशों की प्रतिक्रिया और आगे की रणनीति पर नजर रहेगी।

भारत की ओर से फिलहाल इस विषय पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन रणनीतिक समुदाय में इसे लेकर चर्चा तेज हो गई है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस कदम के व्यापक प्रभाव और इसके पीछे की अमेरिकी रणनीति अधिक स्पष्ट हो सकेगी।

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