नई दिल्ली। दिल्ली के जंतर-मंतर पर जुलाई में छात्रों के विरोध-प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा और पुलिस कार्रवाई के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने जांच समिति को एक महीने के भीतर प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि जांच के लिए गठित समिति अनिश्चितकाल तक शिकायतों का इंतजार नहीं कर सकती।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने गुरुवार को मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि समिति को अब तक पीड़ितों की ओर से बहुत कम शिकायतें मिली हैं। शिकायतों के अभाव में जांच आगे बढ़ाने में कठिनाई आ रही है। अदालत ने निर्देश दिया कि अब तक उपलब्ध याचिकाओं, वीडियो फुटेज और अन्य दस्तावेजों के आधार पर जांच आगे बढ़ाई जाए।
पूर्व न्यायाधीश की अध्यक्षता में बनी है समिति
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की निष्पक्ष जांच के लिए पूर्व न्यायाधीश आर. सुभाष रेड्डी की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय उच्चस्तरीय जांच समिति गठित की थी। समिति को प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा कथित अत्यधिक बल प्रयोग, पैलेट गन के इस्तेमाल, महिला प्रदर्शनकारियों के साथ कथित दुर्व्यवहार और प्रदर्शनकारियों की ओर से हुई हिंसा की जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि शिकायतों के लिए पोर्टल और ईमेल की व्यवस्था की गई है। मीडिया के माध्यम से भी लोगों को जानकारी दी गई, लेकिन समिति के सामने बहुत कम लोग पहुंचे। अदालत ने याचिकाकर्ताओं को पीड़ितों से संपर्क कर शिकायतें और साक्ष्य उपलब्ध कराने के लिए कहा।
2 दिसंबर को होगी अगली सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पीड़ितों की ओर से उनके वकीलों द्वारा प्रस्तुत याचिकाओं, वीडियो और अन्य साक्ष्यों पर भी समिति विचार कर सकती है। संबंधित अधिकारियों से जवाब लेकर जांच पूरी करने और एक महीने के भीतर प्रारंभिक रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया गया है।
मामले की अगली सुनवाई 2 दिसंबर को होगी। अदालत ने उम्मीद जताई कि तय समयसीमा में जांच की प्रगति सामने आएगी।




