कोलकाता/नई दिल्ली: देश के पांच राज्यों में जारी लोकतंत्र के महापर्व के बीच राजनीतिक सरगर्मी अब अपने चरम पर पहुँच गई है। असम, केरल और केंद्र शासित प्रदेश पुदुचेरी में मतदान की प्रक्रिया शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न होने के बाद, अब सभी राजनीतिक दलों ने अपना पूरा ध्यान पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु के शेष चरणों पर केंद्रित कर दिया है। विशेष रूप से पश्चिम बंगाल में सत्ता की चाबी हासिल करने के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अपने दिग्गज नेताओं को मैदान में उतारकर चुनावी अभियान को और तेज कर दिया है।
भाजपा का ‘मिशन बंगाल’: दिग्गजों का जमावड़ा
सोमवार को बंगाल की धरती पर भाजपा के शीर्ष नेतृत्व का जमावड़ा देखने को मिलेगा। पार्टी ने मतदाताओं को साधने के लिए रैलियों और रोड शो की विस्तृत योजना तैयार की है।
- जेपी नड्डा का शक्ति प्रदर्शन: भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा आज बंगाल के विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों में चुनावी जनसभाओं को संबोधित करेंगे। उनके रोड शो के माध्यम से पार्टी अपनी संगठनात्मक शक्ति का प्रदर्शन करने की तैयारी में है।
- नितिन नवीन की सक्रियता: बिहार भाजपा के कद्दावर नेता और चुनाव प्रबंधन में माहिर नितिन नवीन भी आज विभिन्न संगठनात्मक बैठकों और जनसंपर्क अभियानों का नेतृत्व करेंगे। उनका जोर स्थानीय मुद्दों के जरिए तृणमूल कांग्रेस (TMC) को घेरने पर रहेगा।
बाकी राज्यों में मतदान संपन्न, अब बंगाल-तमिलनाडु पर नजर
चुनाव आयोग के कार्यक्रम के अनुसार, दक्षिण भारत के महत्वपूर्ण राज्यों और असम में चुनावी प्रक्रिया का बड़ा हिस्सा पूरा हो चुका है।
- असम, केरल और पुदुचेरी: इन राज्यों में मतदान संपन्न हो चुका है और अब प्रत्याशियों की किस्मत ईवीएम में कैद है।
- अगला पड़ाव: अब मुख्य मुकाबला पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में है। तमिलनाडु में एक ही चरण में होने वाले मतदान के लिए प्रचार युद्ध अंतिम दौर में है, जबकि बंगाल में बहु-चरणीय मतदान के चलते रणनीतियों का खेल और लंबा खिंच रहा है।
मुद्दों की राजनीति और जुबानी जंग
सभी प्रमुख दल और गठबंधन मतदाताओं के बीच अपनी पैठ मजबूत करने के लिए विभिन्न स्थानीय और राष्ट्रीय मुद्दों को उछाल रहे हैं।
- विकास बनाम अस्मिता: जहाँ भाजपा ‘सोनार बांग्ला’ और भ्रष्टाचार मुक्त शासन के वादे के साथ मैदान में है, वहीं टीएमसी ‘बंगाल की बेटी’ और क्षेत्रीय पहचान के मुद्दे पर वोट मांग रही है।
- वोटरों को साधने की कवायद: नेता घर-घर जाकर संपर्क कर रहे हैं और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के जरिए भी युवा मतदाताओं तक अपनी बात पहुँचाने की कोशिश कर रहे हैं।





