Top 5 This Week

Related Posts

चुनावी काले धन पर सुप्रीम कोर्ट का शिकंजा, जांच एक साल में पूरी करने का आदेश

नई दिल्ली। चुनावों में काले धन के इस्तेमाल को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए जांच एजेंसियों को समयबद्ध कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। शीर्ष अदालत ने कहा कि चुनावी प्रक्रिया में अवैध धन का इस्तेमाल लोकतंत्र और कानून के शासन के लिए गंभीर खतरा है। ऐसे मामलों की जांच को अनिश्चितकाल तक लंबित नहीं रखा जा सकता।

सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि चुनावों के दौरान काले धन के इस्तेमाल से जुड़े मामलों की जांच एक वर्ष के भीतर पूरी की जाए। अदालत ने जांच एजेंसियों से प्रभावी और समन्वित कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा, ताकि अवैध धन के स्रोत और उसके चुनावी प्रक्रिया में इस्तेमाल की पूरी पड़ताल हो सके।

अदालत की टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब चुनावों में धनबल के बढ़ते प्रभाव को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। बड़ी मात्रा में नकदी और अन्य माध्यमों से मतदाताओं को प्रभावित करने की आशंका चुनाव की निष्पक्षता के लिए चुनौती मानी जाती है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव लोकतांत्रिक व्यवस्था की बुनियाद हैं और इसमें काले धन की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

शीर्ष अदालत ने जांच प्रक्रिया में तेजी लाने के साथ ही संबंधित एजेंसियों को अपनी जिम्मेदारी प्रभावी ढंग से निभाने का संदेश दिया। अदालत का जोर इस बात पर रहा कि चुनावी भ्रष्टाचार और अवैध वित्तीय गतिविधियों से जुड़े मामलों में कार्रवाई केवल कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि दोषियों तक पहुंचने के लिए ठोस जांच की जाए।

सुप्रीम कोर्ट पहले भी राजनीतिक फंडिंग में पारदर्शिता और मतदाताओं के सूचना के अधिकार को महत्वपूर्ण मान चुका है। वर्ष 2024 में अदालत ने चुनावी बांड योजना को असंवैधानिक करार देते हुए राजनीतिक चंदे में पारदर्शिता को लोकतांत्रिक प्रक्रिया का अहम हिस्सा बताया था।

ताजा निर्देशों से चुनावों में धनबल पर अंकुश लगाने की कोशिशों को मजबूती मिलने की उम्मीद है। अदालत का संदेश साफ है कि चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने वाले अवैध धन के खिलाफ जांच तेज, निष्पक्ष और तय समयसीमा के भीतर पूरी होनी चाहिए।

 

Popular Articles