Top 5 This Week

Related Posts

दयारा बुग्याल में दूध-मक्खन की होली, अनूठे अंदाज में मनाया बटर फेस्टिवल

उत्तरकाशी। समुद्रतल से करीब 11 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित दयारा बुग्याल सोमवार को पारंपरिक अंढूड़ी यानी बटर फेस्टिवल के रंग में रंगा नजर आया। मखमली बुग्याल में ग्रामीणों ने गुलाल की जगह दूध, दही और मक्खन से होली खेली। ढोल-दमाऊं की थाप और लोकगीतों के बीच आयोजित इस अनूठे पर्व ने हिमालयी लोक संस्कृति की जीवंत तस्वीर पेश की।

पंचगाई पट्टी के रैथल, नटीण, बंद्राणी, क्यार्क और भटवाड़ी गांवों के ग्रामीण अपने आराध्य समेश्वर देवता की देवडोली के साथ दयारा बुग्याल पहुंचे। बड़ी संख्या में ग्रामीण और श्रद्धालु भी पर्व में शामिल हुए।

पर्व की शुरुआत धार्मिक परंपराओं के साथ हुई। बुग्याल में बनी छानियों में ग्रामीणों ने एकत्र दूध, दही और मक्खन को वन देवताओं तथा स्थानीय देवी-देवताओं को भोग लगाया। इसके बाद राधा-कृष्ण की जोड़ी ने मक्खन से भरी हांडी फोड़ी। हांडी टूटते ही बटर फेस्टिवल का मुख्य उत्सव शुरू हो गया। ग्रामीणों ने एक-दूसरे के चेहरे और शरीर पर दूध, दही और मक्खन लगाकर अनूठी होली खेली।

उत्सव के दौरान महिलाओं ने पारंपरिक लोक वेशभूषा में राधा-कृष्ण की जोड़ी के साथ रासौ-तांदी नृत्य प्रस्तुत किया। पुरुषों ने भी उत्साह के साथ नृत्य में भाग लिया। ढोल-दमाऊं और लोकगीतों की गूंज से पूरा बुग्याल देर तक उत्सवमय बना रहा।

लोक मान्यता के अनुसार अंढूड़ी पर्व की परंपरा पांच पांडवों के पश्वाओं के अवतरित होने से जुड़ी है। इसके बाद समेश्वर देवता की देवडोली के साथ उनके पश्वाओं के अवतरण की परंपरा निभाई जाती है। इस दौरान समेश्वर देवता के आशीर्वाद को भी पर्व का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।

Popular Articles