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गैरसैंण की मांग पर बुजुर्ग आंदोलनकारी का दर्द छलका, पैर में लगीं दो गोलियां आज भी देती हैं टीस

मुजफ्फरनगर गोलीकांड के जख्म याद कर भावुक हुए गोपाल दत्त कुमेड़ी, बोले- राज्य बना, मगर सपने अधूरे

हल्द्वानी। उत्तराखंड राज्य के लिए गोलियां खाने वाले आंदोलनकारियों के सपने आज भी अधूरे हैं। गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने की मांग पर बुद्धपार्क में चल रहे अनशन में बुधवार को 76 वर्षीय राज्य आंदोलनकारी गोपाल दत्त कुमेड़ी बैठे। मुजफ्फरनगर गोलीकांड की यादें साझा करते हुए उन्होंने बताया कि उनके पैर में दो गोलियां लगी थीं और उन्हें मृत घोषित कर दिया गया था। आंदोलन की बर्बरता और महिलाओं के साथ हुई ज्यादती का दर्द आज भी उन्हें झकझोरता है।

कुमेड़ी ने कहा कि राज्य आंदोलन के समय पलायन रोकने, लोगों को हक-हुकूक दिलाने और महिलाओं की सुरक्षा का सपना देखा था, लेकिन आज भी कई सवाल अधूरे हैं। वह आंदोलन स्थल पर बने टेंट में 24 घंटे रहते हैं।
पूर्व आईएएस विनोद प्रसाद रतूड़ी के नेतृत्व में 18 अक्टूबर से चल रहे अनिश्चितकालीन क्रमिक अनशन में विभिन्न जिलों के आंदोलनकारी शामिल हो रहे हैं। गुरुवार को तारा दत्त पांडेय अनशन पर बैठेंगे। रतूड़ी ने बताया कि प्रवासी उत्तराखंडियों समेत विभिन्न जिलों से लोग आंदोलन को समर्थन देने पहुंच रहे हैं।
अल्मोड़ा के मासी से पहुंचे पूर्व सैनिक आनंद राम ने कहा कि उत्तराखंड का निर्माण पहाड़ की अस्मिता, संस्कृति और अस्तित्व बचाने के लिए हुआ था। गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने से पहाड़ के गांव, किसान और आने वाली पीढ़ियों का भविष्य सुरक्षित होगा। उन्होंने आंदोलनकारियों और शहीदों के सपनों को पूरा करने की मांग की।

आंदोलनकारियों ने पलायन, रोजगार और पर्वतीय क्षेत्रों के विकास के सवाल पर एकजुट होकर आंदोलन में भागीदारी बढ़ाने की अपील की। इस दौरान पहाड़ी आर्मी जिलाध्यक्ष राजेंद्र कांडपाल समेत सैकड़ों आंदोलनकारी मौजूद रहे।

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