कालाढूंगी हादसे में पुलिस की बड़ी चूक, जिंदा महिला को मृत दिखाकर भेजा पोस्टमार्टम हाउस
हल्द्वानी। कालाढूंगी में बुधवार रात हुए दर्दनाक सड़क हादसे के बाद पुलिस व्यवस्था की एक गंभीर लापरवाही सामने आई है। हादसे में घायल एक महिला को पुलिस ने मृत मान लिया और पंचनामा तैयार कर उसका नाम शवों की सूची में शामिल करते हुए पोस्टमार्टम के लिए हल्द्वानी भेज दिया। बाद में पता चला कि जिस महिला को मृत घोषित किया गया था, वह जीवित है और उपचाराधीन है।
गुरुवार सुबह हल्द्वानी पोस्टमार्टम हाउस में नाम और पहचान को लेकर विवाद खड़ा हो गया। करीब 20 मिनट तक मौके पर अफरा-तफरी और हंगामा रहा। अभिलेखों और पहचान का दोबारा मिलान करने पर स्थिति स्पष्ट हुई, जिसके बाद दस्तावेजों में संशोधन कर पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी कराई गई।
जानकारी के अनुसार, नैनीताल से घूमकर मेरठ लौट रहे पर्यटकों की कार कालाढूंगी से करीब एक किलोमीटर पहले अनियंत्रित होकर खाई में जा गिरी। हादसे में 29 लोग घायल हो गए, जबकि दो महिलाओं की मौत हो गई। प्रारंभिक पुलिस रिकॉर्ड में नाजरीन (30) पत्नी शाकिर निवासी शकूरनगर लिसाड़ी गेट, मेरठ और फरद बेगम (40) को मृत बताया गया था।
लेकिन जांच में सामने आया कि फरद बेगम जीवित हैं, जबकि हादसे में शहनाज (32) पत्नी नफीस निवासी ताला फैक्ट्री, मेरठ की मृत्यु हुई थी। इस खुलासे ने पुलिस की पहचान प्रक्रिया और कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
हादसे में सामिर, जसीम अहमद, सुहैया, फिजा उर रहमान, ऐना, अबुजर, तस्बिया, अनीस, रुकसान, अमन, मोनिस, नवाब, रेशमा, हैदर आसिफ, बबलू, सना, लाइवा, कुलविया, नईमउद्दीन, माहिरा, आईशा, जुनेरा, फरद बेगम, साद समेत चालक सहजाद नईम घायल हुए हैं, जिनका उपचार जारी है।
प्रेस नोट ने बढ़ाया भ्रम
हादसे के बाद गुरुवार सुबह पुलिस द्वारा जारी प्रेस नोट ने स्थिति को और उलझा दिया। घायलों और मृतकों की जानकारी वाले प्रेस नोट में मृतक महिला को जीवित तथा घायल महिला को मृत घोषित कर दिया गया, जिससे भ्रम और बढ़ गया।
पुलिस की इस लापरवाही पर एसपी सिटी ने कड़ी नाराजगी जताते हुए संबंधित अधिकारियों को फटकार लगाई है। घटना के बाद पुलिस की कार्यशैली और संवेदनशील मामलों में सत्यापन प्रक्रिया को लेकर सवाल उठ रहे हैं।





