उत्तराखंड के कलागढ़ टाइगर रिजर्व में अब आधुनिक तकनीक वन्यजीव संरक्षण और ग्रामीण सुरक्षा दोनों के लिए अहम भूमिका निभा रही है। यहां लागू की गई आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित चेतावनी प्रणाली जंगल से सटे गांवों के लोगों के लिए सुरक्षा कवच साबित हो रही है।
वन विभाग द्वारा शुरू की गई इस स्मार्ट प्रणाली के तहत जंगल के संवेदनशील इलाकों में कैमरे और सेंसर लगाए गए हैं। ये उपकरण बाघ, हाथी या अन्य जंगली जानवरों की गतिविधियों को तुरंत पहचान लेते हैं। जैसे ही कोई वन्यजीव आबादी क्षेत्र की ओर बढ़ता है, सिस्टम स्वतः अलर्ट जारी कर देता है।
अलर्ट मिलने पर वन विभाग की टीम और स्थानीय ग्रामीणों को मोबाइल संदेश या अन्य माध्यमों से सूचना पहुंचाई जाती है। इससे लोगों को पहले ही सतर्क होने का समय मिल जाता है और मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं में कमी आ रही है।
वन अधिकारियों के अनुसार, पहले जंगली जानवरों की अचानक आवाजाही से फसलों और लोगों को नुकसान पहुंचता था। लेकिन अब AI तकनीक के कारण निगरानी अधिक प्रभावी हो गई है। खासकर रात के समय यह प्रणाली बेहद उपयोगी साबित हो रही है।
इस पहल का उद्देश्य केवल लोगों की सुरक्षा नहीं बल्कि वन्यजीवों को भी सुरक्षित रखना है, ताकि घबराहट या टकराव की स्थिति पैदा न हो। भविष्य में इस तकनीक को रिजर्व के अन्य क्षेत्रों में भी विस्तार देने की योजना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक तकनीक और संरक्षण प्रयासों के संयोजन से उत्तराखंड में वन्यजीव प्रबंधन का नया मॉडल विकसित हो सकता है, जो देश के अन्य संरक्षित क्षेत्रों के लिए भी उदाहरण बनेगा।





