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कर्नाटक में भाजपा की वापसी से कांग्रेस पर दबाव, डिफेंसिव मोड में सरकार

नई दिल्ली। कर्नाटक की राजनीति में एक बार फिर सियासी समीकरण बदलते नजर आ रहे हैं। अपनी खोई राजनीतिक जमीन वापस पाने की कोशिश में जुटी भाजपा ने कांग्रेस सरकार और मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार पर दबाव बढ़ा दिया है। प्रभावी मुद्दों और आक्रामक रणनीति के जरिए प्रदेश भाजपा अध्यक्ष बीवाई विजयेंद्र पार्टी को फिर से सक्रिय करने में सफल होते दिख रहे हैं।

मुख्यमंत्री बनने के बाद डीके शिवकुमार को कांग्रेस के लिए मजबूत रणनीतिकार माना जा रहा था। राज्यसभा और विधान परिषद चुनावों में कांग्रेस की सफलता के बाद पार्टी के भीतर यह धारणा मजबूत हुई थी कि भाजपा और जेडीएस के लिए कर्नाटक में वापसी आसान नहीं होगी। हालांकि, पिछले कुछ महीनों में भाजपा ने मुद्दों को आक्रामक तरीके से उठाकर राजनीतिक विमर्श को बदलने की कोशिश की है।

भाजपा ने महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम में कथित 89 करोड़ रुपये की अनियमितताओं को प्रमुख मुद्दा बनाया। पार्टी ने इसके विरोध में रायचूर से बल्लारी तक ‘बल्लारी चलो’ पदयात्रा शुरू की। यात्रा शुरू होने से पहले ही तत्कालीन मंत्री बी. नागेंद्र के इस्तीफे से भाजपा को सरकार पर दबाव बनाने का मौका मिला।

इसके बाद भाजपा ने सूखे की स्थिति को भी मुद्दा बनाया। पार्टी ने मुख्यमंत्री के सूखा प्रभावित क्षेत्रों के हवाई सर्वेक्षण पर सवाल उठाते हुए जमीन पर किसानों के बीच जाने की मांग की। इसके बाद मुख्यमंत्री ने किसानों से सीधे संवाद और जमीनी स्तर पर स्थिति का जायजा लेना शुरू किया। इससे भाजपा को सरकार को घेरने के लिए एक और मुद्दा मिल गया।

भाजपा की सक्रियता ने पार्टी के भीतर भी प्रदेश अध्यक्ष बीवाई विजयेंद्र की स्थिति मजबूत की है। वहीं, कांग्रेस के सामने अब सरकार की उपलब्धियों को प्रभावी ढंग से जनता तक पहुंचाने और विपक्ष के आरोपों का जवाब देने की चुनौती है।

आने वाले समय में ग्रेटर बेंगलुरु के स्थानीय निकाय चुनाव और इसके बाद विधानसभा चुनाव दोनों दलों की रणनीति की बड़ी परीक्षा होंगे। फिलहाल कर्नाटक में भाजपा की आक्रामक वापसी ने कांग्रेस को राजनीतिक रूप से सतर्क और रक्षात्मक स्थिति में ला दिया है।

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