10-12 हथियारबंद बदमाशों ने ऑफिस में मचाया आतंक, नकदी-जेवर और 12 मोबाइल लूटकर फरार
हल्द्वानी। शहर में लगातार बढ़ रही चोरी, लूट और मारपीट की घटनाओं के बीच गोरापड़ाव में हथियारबंद बदमाशों ने पुलिस की कार्यप्रणाली को खुली चुनौती दे डाली। बुधवार देर रात कार से पहुंचे करीब 10 से 12 बदमाशों ने खुद को एसओजी टीम बताकर कमर्शियल ऑफिस में धावा बोल दिया। तमंचों के बल पर लोगों को आतंकित कर बदमाश करीब आठ लाख रुपये की नकदी, दो सोने की चेन, अंगूठियां और 12 मोबाइल फोन लूटकर बरेली रोड की ओर फरार हो गए। वारदात से पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया।
तमंचे ताने, एसओजी का नाम लिया
बुधवार देर रात गोरापड़ाव क्षेत्र स्थित ऑफिस में लोग मौजूद थे। इसी दौरान एक कार आकर रुकी और उसमें से हथियारों से लैस बदमाश बाहर निकले। बदमाशों ने ऑफिस में घुसते ही लोगों पर तमंचे तान दिए और खुद को पुलिस की एसओजी टीम बताया। हथियारों के साये में मौजूद लोग सहम गए और बदमाशों का विरोध नहीं कर सके।
आठ लाख नकदी समेत जेवर और मोबाइल लूटे
बदमाशों ने ऑफिस में रखी करीब आठ लाख रुपये की नकदी कब्जे में ले ली। इसके बाद वहां मौजूद लोगों से सोने की दो चेन और अंगूठियां उतरवा लीं। बदमाश करीब 12 मोबाइल फोन भी अपने साथ ले गए। मोबाइल लूटने का मकसद लोगों को तत्काल पुलिस को सूचना देने से रोकना माना जा रहा है। वारदात के बाद सभी बदमाश कार से बरेली रोड की ओर भाग निकले।
चार टीमें बदमाशों की तलाश में जुटीं
सूचना मिलते ही एसपी सिटी मनोज कत्याल पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे और घटनास्थल का निरीक्षण किया। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए बदमाशों की गिरफ्तारी के लिए चार टीमें गठित की हैं। सर्विलांस टीम भी सक्रिय कर दी गई है।
सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही पुलिस
पुलिस आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है। बदमाश किस रास्ते से आए और वारदात के बाद किस दिशा में फरार हुए, इसकी जानकारी जुटाई जा रही है। कार की पहचान के साथ बदमाशों तक पहुंचने के लिए पुलिस संभावित सुराग तलाश रही है।
बड़ा सवाल : शहर में पुलिस का खौफ कहां?
अपराध पर अंकुश और शहर को अपराधमुक्त करने के पुलिस के दावों के बीच सरेआम तमंचों के बल पर हुई इस दुस्साहसिक लूट ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस के नाम और एसओजी की पहचान का इस्तेमाल कर बदमाशों ने वारदात को अंजाम दिया। अब पुलिस के सामने चुनौती सिर्फ आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं, बल्कि शहर में अपराधियों के बीच पुलिस का खौफ कायम करने की भी है।





