Monday, December 8, 2025

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एसआईआर के दबाव पर कांग्रेस का तीखा हमला

देश के विभिन्न राज्यों में बूथ लेवल ऑफिसरों (BLO) की मौत के मामलों ने राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। कई स्थानों से मिली रिपोर्टों में कहा गया है कि हाल के दिनों में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के दौरान काम के अत्यधिक दबाव ने बीएलओ और पोलिंग अधिकारियों में तनाव बढ़ाया, जिसके चलते कई मौतें और कथित आत्महत्याएं सामने आई हैं। इस मुद्दे पर कांग्रेस ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं और दावा किया है कि प्रशासनिक जल्दबाज़ी और अव्यवस्थित प्रक्रिया अधिकारियों की जान ले रही है।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने शनिवार को X पर पोस्ट करते हुए आरोप लगाया कि पिछले 19 दिनों में एसआईआर अभियान के दौरान 16 बीएलओ की मौत हो चुकी है। खरगे ने कहा कि काम का अतिशय बोझ और अव्यवस्थित प्रक्रियाएं बीएलओ और पोलिंग अधिकारियों को आत्महत्या जैसे कदम उठाने के लिए मजबूर कर रही हैं। उन्होंने इस घटना को “चिंताजनक और मानवीय त्रासदी” बताते हुए कहा कि जिन परिवारों ने अपने सदस्यों को खोया है, उन्हें न्याय दिलाने की जिम्मेदारी किसकी है।

खरगे ने इस अभियान की प्रक्रिया की तुलना नोटबंदी और कोरोना लॉकडाउन से करते हुए कहा कि एसआईआर को बिना योजना और बिना तैयारी के अचानक लागू किया गया, जिसका खामियाजा जमीनी स्तर पर काम करने वाले अधिकारी भुगत रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा वोट चोरी की रणनीति में इतनी आगे बढ़ चुकी है कि यह अब जानलेवा रूप ले चुकी है।” साथ ही उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग की निष्क्रियता भी इन हालात को और बढ़ा रही है।

कांग्रेस अध्यक्ष ने यह भी कहा कि लोकतंत्र के स्तंभों को कमजोर किया जा रहा है और संवैधानिक संस्थाओं पर सत्ता की भूख हावी होती दिखाई दे रही है।” उन्होंने आगाह किया कि यदि इस मुद्दे पर समय रहते आवाज न उठाई गई तो लोकतांत्रिक ढांचा गंभीर क्षति का सामना करेगा।

इसी बीच शनिवार को पश्चिम बंगाल के नादिया जिले में एक महिला बीएलओ अपने घर में मृत मिली। परिजनों के अनुसार वह एसआईआर संबंधी काम के चलते मानसिक दबाव का सामना कर रही थी और तनाव के कारण उसने आत्महत्या कर ली। यह घटना विपक्ष द्वारा उठाए गए सवालों को और तीव्र बना रही है।

कांग्रेस ने केंद्र और चुनाव आयोग से बीएलओ की मौतों की जांच, परिवारों के लिए मुआवजा, और एसआईआर प्रक्रिया में तात्कालिक सुधार की मांग की है। पार्टी ने कहा कि इस संवेदनशील विषय पर चुप्पी और लापरवाही स्वीकार्य नहीं है।

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