देहरादून। उत्तराखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के तहत चुनाव आयोग ने बड़ी कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है। प्रदेश में करीब 19 लाख मतदाताओं के सत्यापन फॉर्म में विसंगतियां मिलने के बाद उन्हें नोटिस जारी किए जाएंगे। आयोग ने चेतावनी दी है कि सत्यापन प्रक्रिया में गलत जानकारी देने या फर्जी दस्तावेज प्रस्तुत करने पर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
चुनाव आयोग के अनुसार, SIR के पहले चरण के बाद जारी ड्राफ्ट मतदाता सूची में कई ऐसे मतदाता सामने आए हैं, जिनके विवरण में त्रुटियां पाई गई हैं। इनमें नाम, पता, उम्र, पारिवारिक विवरण या अन्य जानकारियों में अंतर जैसी विसंगतियां शामिल हैं। इन मतदाताओं को नोटिस देकर रिकॉर्ड दुरुस्त करने का अवसर दिया जाएगा।
अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी विजय कुमार जोगदंडे ने बताया कि नोटिस मिलने के बाद मतदाताओं को अपनी पात्रता और विवरण सही साबित करने के लिए आवश्यक जानकारी या दस्तावेज उपलब्ध कराने होंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल नोटिस जारी होने का मतलब मतदाता सूची से नाम हटाना नहीं है, बल्कि यह सत्यापन प्रक्रिया का हिस्सा है।
अधिकारियों के मुताबिक, जो मतदाता समय पर जवाब नहीं देंगे या गलत जानकारी देने के दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है। गंभीर मामलों में गलत घोषणा या फर्जी जानकारी देने पर कानूनी प्रावधानों के तहत सजा का भी प्रावधान है।
SIR प्रक्रिया के तहत उत्तराखंड में ड्राफ्ट मतदाता सूची में लगभग 71.33 लाख मतदाताओं के नाम शामिल किए गए हैं, जबकि करीब 8.26 लाख नाम ऐसे मतदाताओं के हटाए गए हैं जो अनुपस्थित, मृतक, स्थानांतरित या दोहरे रिकॉर्ड की श्रेणी में पाए गए।
चुनाव आयोग ने मतदाताओं से अपील की है कि वे नोटिस मिलने पर समय पर जवाब दें और अपने विवरण में किसी भी त्रुटि को ठीक कराएं। जिन लोगों ने SIR फॉर्म जमा नहीं किया है, उन्हें निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार नए सिरे से आवेदन करना पड़ सकता है।
आयोग का कहना है कि मतदाता सूची को अधिक सटीक और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से यह पुनरीक्षण अभियान चलाया जा रहा है। अंतिम मतदाता सूची जारी होने से पहले सभी दावों और आपत्तियों का निपटारा किया जाएगा।





