देहरादून। उत्तराखंड में पशुओं में फैलने वाले लंपी त्वचा रोग ने दस्तक दे दी है। राज्य में अब तक सामने आए 635 संदिग्ध मामलों में जांच के लिए भेजे गए 269 नमूनों में से 55 की रिपोर्ट विभाग को मिल चुकी है। इनमें 21 नमूनों में लंपी रोग की पुष्टि हुई है। नैनीताल में इस बीमारी से एक बछड़े की मौत भी हो चुकी है।
पशुपालन विभाग के निदेशक डॉ. उदय शंकर के अनुसार देहरादून, नैनीताल, पौड़ी, ऊधमसिंह नगर, हरिद्वार, रुद्रप्रयाग और टिहरी जिलों में संदिग्ध मामले सामने आए हैं। विभाग ने स्थिति को देखते हुए संबंधित जिलों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए हैं और निगरानी बढ़ा दी है।
रोजाना पांच से छह हजार पशुओं का टीकाकरण
लंपी रोग के प्रसार को रोकने के लिए पशुपालन विभाग टीकाकरण और साफ-सफाई पर विशेष जोर दे रहा है। विभाग के मुताबिक प्रतिदिन करीब पांच से छह हजार मवेशियों को वैक्सीन लगाई जा रही है। संदिग्ध पशुओं को स्वस्थ पशुओं से अलग रखने की सलाह भी दी गई है, ताकि संक्रमण को फैलने से रोका जा सके।
विभाग के अनुसार सामने आए संदिग्ध मामलों में से 427 मवेशी उपचार के बाद स्वस्थ हो चुके हैं। अधिकारियों ने पशुपालकों से पशुओं में बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर तत्काल विभाग को सूचना देने और संक्रमित या संदिग्ध पशुओं को अलग रखने की अपील की है।
लंपी रोग की पुष्टि के बाद राज्य में पशुपालन विभाग की सक्रियता बढ़ गई है। अब विभाग का मुख्य जोर संक्रमण की रोकथाम, नियमित निगरानी और अधिक से अधिक पशुओं के टीकाकरण पर है।





