बर्लिन। जर्मनी के सैक्सोनी-आनहाल्ट प्रांत में दक्षिणपंथी पार्टी अल्टरनेटिव फॉर जर्मनी (AfD) ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की है। पार्टी को करीब 44 प्रतिशत वोट मिले हैं। यह नतीजा द्वितीय विश्व युद्ध के बाद पहली बार किसी दक्षिणपंथी पार्टी के राज्य स्तर पर सत्ता में आने की संभावना को मजबूत करता है। हालांकि AfD स्पष्ट बहुमत से कुछ सीट दूर रह गई है।
83 सदस्यीय राज्य विधानसभा में AfD को 39 सीटें मिली हैं, जबकि बहुमत के लिए 42 सीटों की जरूरत है। पार्टी के शीर्ष उम्मीदवार उलरिख सीगमुंड ने परिणाम को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि मतदाताओं ने राजनीतिक बदलाव के पक्ष में स्पष्ट जनादेश दिया है। AfD ने चुनाव प्रचार के दौरान आव्रजन पर सख्त रुख, रूस के साथ संबंध सुधारने और यूक्रेन को समर्थन कम करने जैसे मुद्दों को प्रमुखता दी थी।
इस चुनाव में चांसलर फ्रेडरिक मर्ज की कंजरवेटिव CDU को बड़ा झटका लगा है। CDU को करीब 17-18 प्रतिशत वोट ही मिले और वह दूसरे स्थान पर रही। पिछले कई वर्षों से सैक्सोनी-आनहाल्ट में मजबूत रही CDU के लिए यह परिणाम राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
AfD की सबसे बड़ी चुनौती अब सरकार बनाने की है। जर्मनी की मुख्यधारा की पार्टियां अब तक AfD के साथ गठबंधन से इनकार करती रही हैं। पार्टी को देश की घरेलू खुफिया एजेंसी के कुछ क्षेत्रीय संगठनों द्वारा दक्षिणपंथी चरमपंथी संगठन के रूप में वर्गीकृत किया गया है। ऐसे में अन्य दलों के साथ गठबंधन की संभावना बेहद सीमित दिखाई दे रही है।
सैक्सोनी-आनहाल्ट के चुनाव में मतदान प्रतिशत भी काफी ऊंचा रहा। करीब 78 प्रतिशत मतदाताओं ने मतदान किया। विश्लेषकों के मुताबिक यह परिणाम केवल राज्य की राजनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी AfD के बढ़ते प्रभाव का संकेत है। पार्टी 2029 के संघीय चुनाव में सत्ता हासिल करने की महत्वाकांक्षा पहले ही जाहिर कर चुकी है।
AfD की इस कामयाबी ने चांसलर मर्ज की सरकार पर भी दबाव बढ़ा दिया है। जर्मनी की राजनीति में अब यह सवाल अहम हो गया है कि मुख्यधारा के दल AfD के बढ़ते जनाधार का मुकाबला किस रणनीति से करेंगे और सैक्सोनी-आनहाल्ट में नई सरकार का गठन किस तरह होगा।




