Top 5 This Week

Related Posts

उत्तराखंड में ‘महिला कार्ड’ के सहारे भाजपा की बड़ी बिसात; विधानसभा के विशेष सत्र से विपक्ष की घेराबंदी, चुनावी हैट्रिक पर नजर

देहरादून: उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनाव यानी छठी विधानसभा के रण के लिए भारतीय जनता पार्टी ने अपनी रणनीतिक चालें चलनी शुरू कर दी हैं। राज्य में लगातार तीसरी बार सत्ता हासिल कर ‘हैटट्रिक’ लगाने का लक्ष्य लेकर चल रही भाजपा ने ‘महिला आरक्षण’ को अपना सबसे बड़ा हथियार बनाया है। विधानसभा के हालिया एक दिवसीय विशेष सत्र के बहाने सत्ताधारी दल ने कांग्रेस समेत समूचे विपक्ष के लिए एक ऐसा राजनीतिक अखाड़ा तैयार कर दिया है, जहाँ भाजपा के दांव की काट ढूंढना विपक्षी दलों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।

आधी आबादी पर नजर: राजनीतिक शक्ति और चुनावी समीकरण

भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व भले ही राष्ट्रीय स्तर पर महिला आरक्षण को तत्काल लागू करने की हसरत को अभी पूरी तरह धरातल पर न उतार पाया हो, लेकिन उत्तराखंड में धामी सरकार ने इसे राज्य की अस्मिता और सम्मान से जोड़ दिया है।

  • रणनीतिक बढ़त: भाजपा ने विशेष सत्र के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की है कि वह महिला सशक्तीकरण के प्रति न केवल गंभीर है, बल्कि उन्हें वास्तविक राजनीतिक शक्ति सौंपने की पक्षधर भी है।
  • विपक्ष के लिए असहज स्थिति: इस कदम ने कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों को रक्षात्मक मुद्रा में ला खड़ा किया है, क्योंकि इस मुद्दे का खुला विरोध करना उनके लिए ‘महिला विरोधी’ कहलाने का जोखिम पैदा कर सकता है।

कांग्रेस की रणनीति पर भाजपा का ‘चेकमेट’

पिछले चार वर्षों से कांग्रेस पार्टी राज्य में महिलाओं के विरुद्ध हुए अपराधों को मुद्दा बनाकर धामी सरकार पर निरंतर हमलावर रही है।

  • मुद्दों का ध्रुवीकरण: कांग्रेस ने अंकिता भंडारी प्रकरण जैसे मामलों को हथियार बनाकर महिला मतदाताओं के बीच पैठ बनाने की कोशिश की थी। हालांकि, भाजपा द्वारा ‘नारी शक्ति वंदन’ और आरक्षण के मुद्दे को विधानसभा के पटल पर लाने से कांग्रेस की पुरानी रणनीति कमजोर पड़ती दिख रही है।
  • समर्थन की मजबूरी: मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने सदन में आरक्षण का समर्थन कर नुकसान की भरपाई करने की कोशिश तो की है, लेकिन भाजपा ने जिस तरह से इस पूरे नैरेटिव को अपने पक्ष में मोड़ा है, उसने कांग्रेस को नए सिरे से अपनी चुनावी रणनीति पर विचार करने के लिए मजबूर कर दिया है।

चुनावी दंगल का बढ़ा रोमांच

विशेषज्ञों का मानना है कि भाजपा की यह चाल केवल एक विधायी प्रक्रिया नहीं, बल्कि एक सोची-समझी चुनावी बिसात है।

  1. महिला मतदाताओं का महत्व: उत्तराखंड में महिला मतदाताओं की संख्या और उनका मतदान प्रतिशत निर्णायक भूमिका निभाता है। भाजपा इसी ‘साइलेंट वोटर’ वर्ग को अपने पाले में पूरी तरह लामबंद करना चाहती है।
  2. धामी सरकार का आत्मविश्वास: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी इस कदम के जरिए खुद को महिलाओं के अधिकारों के संरक्षक के रूप में पेश करने में सफल रहे हैं, जिससे सत्ता विरोधी लहर (Anti-incumbency) को कम करने में मदद मिल सकती है।

Popular Articles