देहरादून। उत्तराखंड सरकार युवाओं, प्रवासियों, कारीगरों और शिक्षित बेरोजगारों को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना 2.0 चला रही है। योजना के तहत पात्र लोगों को अपना व्यवसाय शुरू करने के लिए बैंक के माध्यम से ऋण और सरकार की ओर से सब्सिडी दी जाती है। इसका उद्देश्य युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराने के साथ प्रदेश से पलायन रोकना है।
योजना में विनिर्माण क्षेत्र के लिए अधिकतम 25 लाख रुपये, जबकि सेवा और व्यापार क्षेत्र के लिए 10 लाख रुपये तक की परियोजना लागत पर ऋण की सुविधा है। छोटे कारोबार और सूक्ष्म गतिविधियों के लिए भी वित्तीय सहायता का प्रावधान किया गया है। योजना को 2030 तक लागू रखने का लक्ष्य है।
मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना 2.0 में सब्सिडी को पहले की तुलना में बढ़ाया गया है। परियोजना और क्षेत्र के आधार पर 15 से 30 प्रतिशत तक मार्जिन मनी सब्सिडी मिल सकती है। इसके अलावा भौगोलिक, सामाजिक और उत्पाद आधारित बूस्टर के तहत अतिरिक्त सहायता का भी प्रावधान है।
योजना का लाभ उत्तराखंड के मूल या स्थायी निवासी युवा, महिलाएं, प्रवासी, कारीगर, हस्तशिल्पी और शिक्षित बेरोजगार ले सकते हैं। सरकार के अनुसार योजना के जरिए स्थानीय स्तर पर उद्यम स्थापित कर रोजगार के नए अवसर पैदा करने पर जोर दिया जा रहा है।
योजना के तहत खाद्य प्रसंस्करण, डेयरी, मशरूम उत्पादन, फर्नीचर, मोबाइल रिपेयरिंग, फोटोग्राफी, टैक्सी, टेंट हाउस, रेडीमेड कपड़े, सिलाई-कढ़ाई, आर्टिफिशियल ज्वेलरी, साइबर कैफे और अन्य कई गतिविधियों के लिए आवेदन किया जा सकता है।
इच्छुक अभ्यर्थी मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के ऑनलाइन पोर्टल पर आवेदन कर सकते हैं। आवेदन की जांच उद्योग विभाग करता है, जिसके बाद पात्र प्रस्ताव ऋण स्वीकृति के लिए संबंधित बैंक को भेजे जाते हैं। पांच लाख रुपये तक के ऋण आवेदनों के लिए दो सप्ताह और पांच से 25 लाख रुपये तक के आवेदनों के लिए तीन सप्ताह की बैंक प्रक्रिया समय-सीमा निर्धारित की गई है।





