देहरादून: उत्तराखंड के शहरी निकायों में अधिशासी अधिकारियों (ईओ) की कमी को दूर करने के लिए शहरी विकास निदेशालय ने बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। विभाग ने कई नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों में नियमित ईओ की अनुपलब्धता के चलते क्लर्क, सफाई निरीक्षक, कर निरीक्षक, कर अधीक्षक और अकाउंट कर्मचारियों को प्रभारी अधिशासी अधिकारी की जिम्मेदारी सौंप दी है।
शहरी विकास निदेशालय की ओर से जारी आदेशों के बाद निकायों में नई जिम्मेदारियां तय की गई हैं। विभाग में नियमित ईओ के सीमित पद होने और कई अधिकारियों की तैनाती नगर निगमों में किए जाने के कारण खाली हुए पदों पर वैकल्पिक व्यवस्था के तहत यह नियुक्तियां की गई हैं।
आदेश के अनुसार, विभिन्न संवर्गों के कर्मचारियों को अलग-अलग नगर निकायों का प्रभार दिया गया है। इनमें अकाउंट कर्मचारी, कर निरीक्षक, टैक्स वसूली कर्मचारी, क्लर्क और सफाई निरीक्षक शामिल हैं। कई कर्मचारियों को पहली बार निकाय प्रशासन की शीर्ष जिम्मेदारी संभालने का मौका मिला है।
इन नियुक्तियों में अकाउंट कर्मचारी सतीश कुमार को नगर पालिका महुआखेड़ागंज, कर अधीक्षक हेमंत कुमार गुप्ता को नगर पंचायत लंढौरा, मुख्य सफाई निरीक्षक गुरमीत सिंह को नगर पंचायत लंढौरा, टैक्स वसूली कर्मचारी रोशन सिंह पुंडीर को नगर पालिका गौचर और अन्य कर्मचारियों को टिहरी, नानकमत्ता, बाजपुर, पिरान कलियर, ढंडेरा, तपोवन, कालाढूंगी, देवप्रयाग, ऊखीमठ, जसपुर, उत्तरकाशी, चमियाला, लालकुआं और बड़कोट जैसे निकायों में प्रभारी ईओ बनाया गया है।
विभाग के इस फैसले को लेकर प्रशासनिक हलकों में चर्चा शुरू हो गई है। जानकारों का कहना है कि प्रभारी ईओ के रूप में तैनाती से निकायों के रोजमर्रा के कामकाज को गति मिल सकती है, लेकिन बड़ी प्रशासनिक और वित्तीय जिम्मेदारियों के संचालन को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं।
शहरी विकास विभाग के सामने लंबे समय से नगर निकायों में अधिकारियों की कमी एक चुनौती रही है। नई व्यवस्था के जरिए विभाग ने फिलहाल खाली पदों को भरने का प्रयास किया है। अब इन प्रभारी अधिकारियों के कामकाज और निकायों के संचालन पर सभी की नजर रहेगी।





