वॉशिंगटन। ईरान के खिलाफ अमेरिका ने आर्थिक दबाव और बढ़ाने का संकेत दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर ‘इकोनॉमिक D-Day’ की घोषणा करते हुए कहा है कि अब तेहरान पर अभूतपूर्व आर्थिक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने उन देशों और संस्थाओं को भी गंभीर आर्थिक परिणाम भुगतने की चेतावनी दी है, जो ईरान का वित्तीय या कारोबारी समर्थन जारी रखेंगे।
ट्रंप ने कहा कि ईरान की मदद करने वाले वित्तीय संस्थानों, कंपनियों और अन्य संस्थाओं को अमेरिकी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। अमेरिकी प्रशासन का जोर ईरान के तेल कारोबार, तेल तस्करी और वित्तीय लेनदेन को निशाना बनाकर उसकी अर्थव्यवस्था को और अलग-थलग करने पर है। ट्रंप ने अपने सहयोगी देशों से भी इस अभियान में अमेरिका का साथ देने की अपील की है।
यह घोषणा अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच हुई है। दोनों देशों के बीच समझौते की दिशा में तय 60 दिन की अवधि बिना किसी ठोस प्रगति के समाप्त हो चुकी है। इसके बाद वाशिंगटन ने आर्थिक दबाव बढ़ाने का रास्ता अपनाया है। अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि कड़े आर्थिक प्रतिबंधों से ईरान पर बातचीत की मेज पर लौटने का दबाव बढ़ सकता है।
ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका का उद्देश्य ईरान को आर्थिक रूप से कमजोर करना और उसके परमाणु हथियार हासिल करने की संभावना को रोकना है। वहीं, ईरान लगातार अमेरिकी दबाव का विरोध कर रहा है। दोनों देशों के बीच तनाव का असर रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य पर भी पड़ रहा है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति और ऊर्जा बाजारों को लेकर चिंता बढ़ी हुई है।
अमेरिकी कदम से आने वाले दिनों में ईरान के साथ कारोबार करने वाले देशों पर भी दबाव बढ़ने की आशंका है। खास तौर पर ईरान के प्रमुख व्यापारिक साझेदारों के साथ अमेरिका के संबंधों पर इसका असर पड़ सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, आर्थिक प्रतिबंधों का विस्तार क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा सकता है।





