नई दिल्ली/वॉशिंगटन। अमेरिका और ईरान ने वर्षों से चले आ रहे तनाव और सैन्य संघर्ष को समाप्त करने के लिए एक ऐतिहासिक शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते को दोनों देशों के बीच संबंधों में एक बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है, जिससे मध्य पूर्व में स्थिरता की उम्मीद बढ़ी है।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, यह समझौता एक 14-सूत्रीय (14-point) मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) के रूप में तैयार किया गया है, जिसे हाल ही में डिजिटल माध्यम से अंतिम रूप दिया गया। इस समझौते के तहत दोनों देशों ने तुरंत सैन्य गतिविधियों को रोकने और संघर्ष समाप्त करने पर सहमति जताई है।
समझौते के प्रमुख प्रावधानों में शामिल है कि दोनों पक्ष क्षेत्र में शांति बनाए रखने के लिए सहयोग करेंगे तथा समुद्री मार्गों, विशेषकर होर्मुज जलडमरूमध्य, को अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए सुरक्षित और खुला रखा जाएगा। इसके साथ ही ईरान पर लगाए गए प्रतिबंधों को चरणबद्ध तरीके से हटाने और आर्थिक पुनर्निर्माण के लिए सहायता पैकेज की व्यवस्था पर भी सहमति बनी है।
ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर भी अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की निगरानी स्वीकार करने की बात कही है, जबकि अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि किसी भी स्थिति में ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
सूत्रों के मुताबिक, समझौते के बाद अगले 60 दिनों तक विस्तृत वार्ताएं चलेंगी, जिनमें सभी लंबित मुद्दों पर अंतिम सहमति बनाने का प्रयास किया जाएगा।
इस समझौते को वैश्विक स्तर पर एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक सफलता माना जा रहा है, हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि इसके क्रियान्वयन और क्षेत्रीय शक्तियों की प्रतिक्रिया पर इसकी सफलता निर्भर करेगी।
फिलहाल दोनों देशों ने इसे “शांति की दिशा में निर्णायक कदम” बताया है, जिससे लंबे समय से जारी युद्ध और तनाव में कमी आने की उम्मीद जताई जा रही है।





