Top 5 This Week

Related Posts

संसद में ‘शक्ति’ और ‘सीटों’ पर महामंथन: महिला आरक्षण व परिसीमन विधेयकों पर पक्ष-विपक्ष में तीखी बहस, जानें किसने क्या कहा

नई दिल्ली: भारतीय संसद के विशेष सत्र में आज लोकतंत्र के भविष्य को नई दिशा देने वाले तीन महत्वपूर्ण विधेयकों पर ऐतिहासिक चर्चा शुरू हुई। लोकसभा और विधानसभाओं में सीटों की संख्या बढ़ाने (परिसीमन) और 33 प्रतिशत महिला आरक्षण को धरातल पर उतारने के सरकारी प्रस्तावों ने सदन का तापमान बढ़ा दिया है। चर्चा की शुरुआत से पहले हुए मतविभाजन में सरकार के पक्ष में 251 वोट पड़े, जबकि 185 सांसदों ने विरोध में मतदान किया।

सरकार का पक्ष: “ऐतिहासिक अन्याय का अंत”

केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने विधेयकों पर चर्चा की शुरुआत करते हुए सरकार का विजन रखा। उन्होंने स्पष्ट किया कि महिला आरक्षण को साल 2026 के बाद होने वाली जनगणना और परिसीमन के आधार पर ही लागू किया जाएगा।

  • बढ़ेगी संसद की ताकत: मेघवाल ने बताया कि परिसीमन के बाद लोकसभा सीटों की संख्या में लगभग 50 प्रतिशत की वृद्धि होगी, जिससे कुल सीटें 815 तक पहुँच सकती हैं।
  • महिलाओं की हिस्सेदारी: नई व्यवस्था के तहत 815 में से 272 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।
  • राज्यों को आश्वासन: सरकार ने भरोसा दिलाया कि इस बदलाव से किसी भी राज्य की वर्तमान ताकत कम नहीं होगी, बल्कि प्रतिनिधित्व और सुदृढ़ होगा।

गृह मंत्री अमित शाह ने देशवासियों को आश्वस्त किया कि पूरी चर्चा और आम सहमति के बाद ही कानून में संशोधन होंगे। उन्होंने जनगणना में ‘जातिगत पहलू’ पर भी सदन को सकारात्मक भरोसा दिलाया।

विपक्ष की आपत्तियां: “पीछे के दरवाजे से परिसीमन की कोशिश”

कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्षी दलों ने महिला आरक्षण को परिसीमन से जोड़ने पर कड़ी आपत्ति जताई।

  • कांग्रेस का रुख: सांसद गौरव गोगोई ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि आरक्षण को परिसीमन से जोड़ना केवल इसमें देरी करने की एक चाल है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार महिला आरक्षण की आड़ में ‘बैकडोर’ से परिसीमन थोपना चाहती है। गोगोई ने मांग की कि आरक्षण को तुरंत लागू किया जाए, तभी कांग्रेस इसका पूर्ण समर्थन करेगी।
  • समाजवादी पार्टी का हमला: सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि वे महिला आरक्षण के समर्थक हैं, लेकिन भाजपा इसे सिर्फ एक चुनावी नारे के रूप में इस्तेमाल कर रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि जेंडर जस्टिस की बात करने वाली भाजपा ने अपने शासित राज्यों में महिला मुख्यमंत्री क्यों नहीं बनाईं।

दक्षिण भारत और ‘सीटों के नुकसान’ का भ्रम

भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या ने चर्चा में हस्तक्षेप करते हुए दक्षिण भारतीय राज्यों में फैलाए जा रहे भ्रम पर जवाब दिया।

  • बढ़ेगा प्रतिनिधित्व: सूर्या ने आंकड़े पेश करते हुए बताया कि परिसीमन से तमिलनाडु जैसी रियासतों की सीटें 39 से बढ़कर 59 तक हो सकती हैं।
  • संवैधानिक प्रक्रिया: उन्होंने विपक्ष के ‘बैकडोर’ वाले आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि सीटों को फ्रीज रखने से वोट की वैल्यू असंतुलित हो जाएगी। सूर्या ने पूर्ववर्ती सरकारों पर 40 साल तक इस मुद्दे को लटकाने का आरोप भी लगाया।

Popular Articles