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भारत-ऑस्ट्रिया संबंधों में नए युग का सूत्रपात: पीएम मोदी और चांसलर स्टॉकर के बीच उच्च स्तरीय बैठक, व्यापार और तकनीक पर हुए कई समझौते

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ऑस्ट्रिया के चांसलर डॉ. क्रिश्चियन स्टॉकर के बीच गुरुवार को नई दिल्ली के ऐतिहासिक हैदराबाद हाउस में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और सार्थक बैठक संपन्न हुई। चांसलर स्टॉकर की इस आधिकारिक यात्रा का मुख्य ध्येय दोनों देशों के बीच सात दशकों से चले आ रहे कूटनीतिक संबंधों को एक नई ऊंचाई और आधुनिक स्वरूप प्रदान करना है। इस उच्च स्तरीय वार्ता में भारत की ओर से विदेश मंत्री एस. जयशंकर और केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल भी विशेष रूप से उपस्थित रहे।

रणनीतिक सहयोग और समझौतों पर हस्ताक्षर

द्विपक्षीय वार्ता के दौरान दोनों नेताओं ने व्यापार, निवेश, ऊर्जा और सुरक्षा जैसे विविध क्षेत्रों पर व्यापक चर्चा की। बैठक के सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव में भारत और ऑस्ट्रिया के बीच कई महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए गए। ये समझौते मुख्य रूप से आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देने और दोनों देशों के उद्योगों के बीच समन्वय स्थापित करने के उद्देश्य से किए गए हैं।

साझा प्रेस विज्ञप्ति: पीएम मोदी का संबोधन

वार्ता के पश्चात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चांसलर स्टॉकर ने एक संयुक्त प्रेस विज्ञप्ति जारी की। इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने दोनों देशों के प्रगाढ़ होते रिश्तों को रेखांकित करते हुए निम्नलिखित प्रमुख बातें कहीं:

  • व्यापार और निवेश: प्रधानमंत्री ने कहा कि चांसलर स्टॉकर का यह दौरा भारत-ऑस्ट्रिया के आर्थिक संबंधों में नई ऊर्जा का संचार करेगा। उन्होंने विश्वास जताया कि इससे दोनों देशों के बीच व्यापार और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) के नए द्वार खुलेंगे।
  • टेक्नोलॉजी और सप्लाई चेन: पीएम मोदी ने वैश्विक चुनौतियों का जिक्र करते हुए कहा कि भारत और ऑस्ट्रिया मिलकर आधुनिक तकनीक और स्थिर सप्लाई चेन (आपूर्ति श्रृंखला) के निर्माण पर काम करेंगे। इसका उद्देश्य विश्व को सुरक्षित और भरोसेमंद तकनीकी समाधान प्रदान करना है।
  • साझा विजन: उन्होंने ऑस्ट्रिया को भारत का एक महत्वपूर्ण साझेदार बताया और कहा कि यह सहयोग केवल दो देशों तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक स्थिरता के लिए भी अहम है।

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