वाशिंगटन। भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में व्यापक सुधारों की मांग दोहराते हुए कहा है कि वीटो शक्ति का इस्तेमाल संकीर्ण राजनीतिक हितों को साधने के लिए नहीं होना चाहिए। भारत ने स्पष्ट किया कि सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्यों को मिले इस विशेषाधिकार का उपयोग अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के व्यापक हितों को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए।
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पार्थवनेनी हरीश ने कहा कि वीटो केवल अधिकार नहीं, बल्कि एक बड़ी जिम्मेदारी भी है। इसका इस्तेमाल बेहद संयम और जवाबदेही के साथ होना चाहिए, ताकि वैश्विक संकटों से निपटने में सुरक्षा परिषद की विश्वसनीयता बनी रहे।
वीटो के बार-बार इस्तेमाल पर चिंता
भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि वीटो के असंतुलित इस्तेमाल से सुरक्षा परिषद की साख प्रभावित हुई है। संयुक्त राष्ट्र के इतिहास में अब तक करीब 200 प्रस्तावों पर 331 बार वीटो का इस्तेमाल किया जा चुका है। भारत का मानना है कि इस शक्ति के उपयोग में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना जरूरी है।
उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि वर्ष 2022 में वीटो के इस्तेमाल पर जवाबदेही बढ़ाने के लिए कदम उठाए गए थे, लेकिन इसके बावजूद समस्या पूरी तरह दूर नहीं हुई है।
सुरक्षा परिषद में व्यापक बदलाव जरूरी
भारत ने कहा कि सुरक्षा परिषद में सुधार केवल वीटो व्यवस्था तक सीमित नहीं रहने चाहिए। इसके लिए सदस्यता की श्रेणियों, क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व, परिषद के आकार और कार्यप्रणाली सहित सभी प्रमुख मुद्दों पर एक साथ बातचीत होनी चाहिए।
भारत ने सुधार प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए आधिकारिक मसौदे पर आधारित वार्ता शुरू करने और उसके लिए स्पष्ट समयसीमा निर्धारित करने की मांग की। भारत का कहना है कि मौजूदा व्यवस्था दूसरे विश्व युद्ध के बाद की परिस्थितियों में बनी थी और अब इसे वर्तमान वैश्विक वास्तविकताओं के अनुरूप बदलना जरूरी है।
नए स्थायी सदस्यों को भी मिले समान अधिकार
भारत ने अफ्रीकी देशों की साझा मांग का समर्थन करते हुए कहा कि विस्तारित सुरक्षा परिषद में सभी स्थायी सदस्यों को समान अधिकार और जिम्मेदारियां मिलनी चाहिए। भारत के अनुसार, नए स्थायी सदस्यों को वीटो से वंचित रखने वाली दोहरी व्यवस्था असमानता को और बढ़ाएगी।
वर्तमान में सुरक्षा परिषद में 15 सदस्य हैं, जिनमें पांच स्थायी सदस्य—अमेरिका, रूस, चीन, ब्रिटेन और फ्रांस—वीटो शक्ति रखते हैं। शेष 10 सदस्य अस्थायी रूप से चुने जाते हैं।
भारत लंबे समय से सुरक्षा परिषद में स्थायी और अस्थायी, दोनों श्रेणियों की सदस्यता बढ़ाने की मांग कर रहा है। उसका कहना है कि व्यापक सुधारों से ही परिषद अधिक प्रतिनिधित्वपूर्ण, प्रभावी और विश्वसनीय बन सकेगी।




