नई दिल्ली।
भारत में गिरफ्तार किए गए विदेशी अपराधियों में बांग्लादेशी नागरिकों की संख्या सबसे अधिक है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के ताज़ा आंकड़ों में यह तथ्य सामने आया है, जिससे देश में अवैध प्रवासन और सीमा सुरक्षा को लेकर बहस तेज हो गई है।
रिपोर्ट के अनुसार, विभिन्न आपराधिक मामलों में गिरफ्तार विदेशी नागरिकों में बांग्लादेशी नागरिक शीर्ष पर रहे। इनके बाद नेपाल, नाइजीरिया, म्यांमार और अन्य देशों के नागरिकों का स्थान रहा। आंकड़ों से संकेत मिलता है कि भारत-बांग्लादेश की लंबी और संवेदनशील सीमा के कारण दोनों देशों के बीच आवाजाही अधिक रहती है, जिसका असर अपराध संबंधी मामलों में भी दिखाई देता है।
NCRB के डेटा के मुताबिक विदेशी नागरिकों से जुड़े मामलों में चोरी, अवैध प्रवेश, दस्तावेज़ों की जालसाजी, साइबर अपराध और मादक पदार्थों की तस्करी जैसे अपराध प्रमुख रहे। कई मामलों में बिना वैध दस्तावेजों के भारत में प्रवेश या वीज़ा अवधि समाप्त होने के बाद भी देश में रहने के आरोप सामने आए।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि सीमावर्ती राज्यों—विशेषकर पश्चिम बंगाल, असम और त्रिपुरा—में विदेशी नागरिकों से जुड़े मामलों की संख्या अपेक्षाकृत अधिक दर्ज की गई। वहीं महानगरों, खासकर दिल्ली और मुंबई, में भी विदेशी नागरिकों की गिरफ्तारी के मामले सामने आए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और बांग्लादेश के बीच सांस्कृतिक, पारिवारिक और आर्थिक संपर्क पुराने समय से रहे हैं, लेकिन अवैध घुसपैठ और पहचान संबंधी चुनौतियां कानून-व्यवस्था एजेंसियों के लिए लगातार चिंता का विषय बनी हुई हैं। पहले भी NCRB के आंकड़ों में विदेशी कैदियों में बांग्लादेशी नागरिकों की संख्या सबसे अधिक पाई गई थी।
गृह मंत्रालय और सुरक्षा एजेंसियां सीमा प्रबंधन को मजबूत करने, डिजिटल पहचान सत्यापन और राज्यों के बीच समन्वय बढ़ाने पर जोर दे रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि अवैध प्रवासन और उससे जुड़े अपराधों पर नियंत्रण के लिए तकनीकी निगरानी, सीमा चौकसी और कानूनी प्रक्रियाओं को और सख्त किया जा रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह रिपोर्ट केवल कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं बल्कि सीमा प्रबंधन, प्रवासन नीति और क्षेत्रीय सहयोग से जुड़ा व्यापक विषय है, जिस पर केंद्र और राज्य सरकारों को समन्वित रणनीति के साथ काम करना होगा।





