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उत्तराखंड में 23 मदरसों की सरकारी सहायता रोकी, जांच में मिली अनियमितताओं पर सरकार की कार्रवाई

देहरादून। उत्तराखंड सरकार ने राज्य में संचालित 23 मदरसों को दी जा रही सरकारी वित्तीय सहायता रोक दी है। यह निर्णय जांच के दौरान विभिन्न प्रकार की अनियमितताएं सामने आने के बाद लिया गया। सरकार ने स्पष्ट किया है कि शिक्षा संस्थानों में पारदर्शिता और नियमों का पालन सुनिश्चित करना उसकी प्राथमिकता है।

अल्पसंख्यक कल्याण विभाग द्वारा कराई गई जांच में कई मदरसों में पंजीकरण, छात्र संख्या, दस्तावेजी रिकॉर्ड और संचालन संबंधी प्रक्रियाओं में गड़बड़ियां पाई गईं। प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर संबंधित मदरसों की अनुदान राशि तत्काल प्रभाव से रोक दी गई है।

सरकारी अधिकारियों के अनुसार कुछ संस्थानों में वास्तविक छात्र संख्या और प्रस्तुत अभिलेखों में अंतर मिला, जबकि कई जगह निर्धारित मानकों का पालन नहीं किया जा रहा था। इसी के चलते विभाग ने वित्तीय सहायता जारी रखने पर रोक लगाने का फैसला लिया।

राज्य सरकार पहले ही मदरसों के संचालन को लेकर सख्त रुख अपना चुकी है। हाल के महीनों में देहरादून, हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर और नैनीताल सहित कई जिलों में मदरसों का व्यापक सत्यापन अभियान चलाया गया था, जिसमें प्रशासन को वास्तविक स्थिति की रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए थे।

सरकार का कहना है कि मदरसों सहित सभी शिक्षण संस्थानों को निर्धारित नियमों, सुरक्षा मानकों और शैक्षणिक व्यवस्था का पालन करना अनिवार्य होगा। नियमों के अनुरूप कार्य करने वाले संस्थानों को ही भविष्य में सरकारी सहायता दी जाएगी।

अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि जांच प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी और यदि अन्य संस्थानों में भी अनियमितताएं पाई गईं तो उनके खिलाफ इसी तरह की कार्रवाई की जा सकती है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि कार्रवाई किसी समुदाय विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की जा रही है।

इस निर्णय को राज्य में मदरसों की कार्यप्रणाली को व्यवस्थित करने और शिक्षा प्रणाली को नियमबद्ध बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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