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विकसित भारत के लक्ष्य के लिए निजी निवेश जरूरी: मुख्य आर्थिक सलाहकार नागेश्वरन

नई दिल्ली। भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य को हासिल करने के लिए निजी क्षेत्र की पूंजी की भागीदारी बढ़ाना जरूरी है। मुख्य आर्थिक सलाहकार (CEA) वी. अनंत नागेश्वरन ने शनिवार को कहा कि देश के पास बचत का बड़ा आधार है, लेकिन विकसित भारत के लिए जरूरी निवेश जुटाने में निजी पूंजी की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।

नई दिल्ली में आयोजित ‘फाइनेंसिंग इंडियाज जर्नी टुवर्ड्स विकसित भारत’ सम्मेलन के समापन सत्र में नागेश्वरन ने राज्यों की भूमिका पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि विकसित भारत का लक्ष्य हासिल करने के लिए राज्यों का मजबूत होना जरूरी है। अगले पांच वर्ष संसाधन जुटाने और विकास की गति बनाए रखने के लिहाज से महत्वपूर्ण होंगे।

निजी निवेश के लिए बेहतर माहौल जरूरी

नागेश्वरन ने राज्यों से निजी निवेश को बढ़ावा देने के लिए भूमि, बिजली और लॉजिस्टिक्स की बेहतर उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा प्रभावी सिंगल-विंडो मंजूरी व्यवस्था मजबूत करने को कहा। उनका कहना था कि निवेशकों के लिए अनुकूल माहौल तैयार करने से निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाई जा सकती है।

उन्होंने परियोजनाओं की बेहतर तैयारी पर भी जोर दिया। राज्यों को मजबूत प्रोजेक्ट पाइपलाइन और विश्वसनीय परियोजना रिपोर्ट तैयार करने की जरूरत बताई गई, ताकि घरेलू और बहुपक्षीय वित्तीय संस्थानों से निवेश हासिल करना आसान हो सके। साथ ही विकास की संभावनाओं वाले अपेक्षाकृत पिछड़े जिलों तक ऋण की पहुंच बढ़ाने की बात कही गई।

राज्यों के पूंजीगत खर्च पर जोर

CEA ने राज्यों को वित्तीय सीमाओं के बावजूद अपना पूंजीगत खर्च मजबूत करने की सलाह दी। सम्मेलन में महाराष्ट्र के पूर्व अतिरिक्त मुख्य सचिव सुधीर श्रीवास्तव के उस प्रस्ताव का भी उल्लेख हुआ, जिसमें राज्यों के पूंजीगत व्यय को मौजूदा करीब 2.4 प्रतिशत GSDP से बढ़ाकर वित्त वर्ष 2031-32 तक 3 प्रतिशत करने की बात कही गई है।

सम्मेलन में कृषि क्षेत्र में बदलाव, ऊर्जा संक्रमण, नवीकरणीय ऊर्जा, ट्रांसमिशन नेटवर्क, बैटरी स्टोरेज और अन्य विकास परियोजनाओं के वित्तपोषण पर भी चर्चा हुई। राज्यों से जुड़ी कार्य समितियां आगे क्षेत्रवार वित्तीय जरूरतों और ठोस सुझावों पर काम करेंगी।

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