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वंदे मातरम् का अपमान अब अपराध, राष्ट्रपति मुर्मू की मंजूरी के बाद कानून लागू

नई दिल्ली। राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ को अब राष्ट्रीय गान ‘जन गण मन’ के समान कानूनी संरक्षण मिल गया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने रोकथाम अपमान राष्ट्रीय सम्मान (संशोधन) अधिनियम, 2026 को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही राष्ट्रीय गीत के अपमान, उसके गायन में जानबूझकर बाधा डालने या व्यवधान पैदा करने पर आपराधिक कार्रवाई का प्रावधान लागू हो गया है।

यह संशोधन प्रिवेंशन ऑफ इंसल्ट्स टू नेशनल ऑनर एक्ट, 1971 में किया गया है। पहले इस कानून के तहत राष्ट्रीय ध्वज, संविधान और राष्ट्रीय गान से जुड़े अपमान तथा राष्ट्रीय गान के गायन में जानबूझकर बाधा डालने पर कार्रवाई का प्रावधान था। अब इन्हीं प्रावधानों का दायरा राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ तक बढ़ा दिया गया है।

तीन साल तक की सजा का प्रावधान

नए कानून के तहत यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर ‘वंदे मातरम्’ के गायन को रोकता है या इसके गायन में जुटी सभा में व्यवधान पैदा करता है, तो उसे तीन वर्ष तक की जेल, जुर्माना या दोनों की सजा हो सकती है। दोबारा दोषसिद्धि होने पर न्यूनतम एक वर्ष के कारावास का प्रावधान भी है।

संसद में हुआ था जोरदार विरोध

यह विधेयक जुलाई में संसद के मानसून सत्र के दौरान पारित हुआ था। राज्यसभा और लोकसभा में चर्चा के दौरान विपक्षी दलों ने इसके प्रावधानों और व्यावहारिक प्रभाव को लेकर सवाल उठाए थे। सरकार का कहना है कि संशोधन का उद्देश्य राष्ट्रीय गीत को वही वैधानिक संरक्षण देना है, जो राष्ट्रीय गान को प्राप्त है।

राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद अब यह व्यवस्था देशभर में प्रभावी हो गई है। सरकार के अनुसार, इससे ‘वंदे मातरम्’ के सम्मान और राष्ट्रीय प्रतीकों की गरिमा सुनिश्चित करने के लिए कानूनी ढांचा और मजबूत हुआ है।

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