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लोकसभा में महिला आरक्षण पर तीखी बहस: राहुल गांधी का सरकार पर बड़ा हमला; ‘जाति जनगणना’ को लेकर शाह की चालाकी पर उठाए सवाल

नई दिल्ली: संसद के निचले सदन लोकसभा में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ (महिला आरक्षण विधेयक) में संशोधन को लेकर चल रही चर्चा के दौरान शुक्रवार को सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जोरदार जुबानी जंग देखने को मिली। जहाँ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी दलों से एकजुट होकर इस ऐतिहासिक कदम का समर्थन करने की अपील की, वहीं विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए ‘जाति जनगणना’ और ‘प्रतिनिधित्व’ के मुद्दे पर तीखा प्रहार किया।

राहुल गांधी का ‘मनुवाद’ और प्रतिनिधित्व पर प्रहार

सदन को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने सरकार पर आरोप लगाया कि वह आरक्षण के नाम पर पिछड़ों और वंचितों को उनके वास्तविक हक से दूर रख रही है। उन्होंने अपने भाषण में निम्नलिखित प्रमुख बिंदु उठाए:

  • विचारधारा पर सवाल: राहुल गांधी ने कड़े लहजे में कहा कि वर्तमान व्यवस्था में “संविधान से ऊपर मनुवाद” को तरजीह दी जा रही है, जो लोकतंत्र के लिए चिंताजनक है।
  • अमित शाह की ‘चालाकी’ पर कटाक्ष: राहुल ने गृह मंत्री अमित शाह के बयानों का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने सदन में बड़ी चालाकी दिखाने की कोशिश की। राहुल ने कहा, “अमित शाह जी कहते हैं कि जाति जनगणना शुरू हो गई है, और उन्होंने इस बात को दो बार दोहराया कि ‘घरों की कोई जाति नहीं होती’। यह असल मुद्दे से भटकाने की कोशिश है।”
  • 15 साल का विलंब: विपक्ष के नेता ने सवाल उठाया कि क्या जाति जनगणना का उपयोग वास्तव में संसद और विधानसभाओं में उचित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए किया जाएगा? उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की वर्तमान योजना के अनुसार, अगले 15 वर्षों तक जाति जनगणना का राजनीतिक प्रतिनिधित्व से कोई लेना-देना नहीं रहने वाला है, जो कि पिछड़ों के साथ धोखा है।

प्रधानमंत्री की एकजुटता की अपील

दूसरी ओर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सदन में सभी राजनीतिक दलों से मतभेदों को भुलाकर इस विधेयक का समर्थन करने का आग्रह किया। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि यह विधेयक करोड़ों महिलाओं को निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है। सरकार की ओर से तर्क दिया गया कि संशोधन का उद्देश्य तकनीकी बाधाओं को दूर करना है ताकि आरक्षण को जल्द से जल्द प्रभावी बनाया जा सके।

जाति जनगणना बना मुख्य मुद्दा

पूरी बहस के दौरान ‘जाति जनगणना’ और ‘ओबीसी कोटा’ केंद्र बिंदु बने रहे। कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी दलों की मांग है कि महिला आरक्षण के भीतर ही पिछड़ा वर्ग (OBC) की महिलाओं के लिए अलग से कोटा सुनिश्चित किया जाए और इसे तुरंत जनगणना से जोड़कर लागू किया जाए। राहुल गांधी ने स्पष्ट किया कि बिना जाति जनगणना के प्रतिनिधित्व की बात करना बेमानी है।

सदन में बढ़ता राजनीतिक तापमान

राहुल गांधी के इन आरोपों के बाद सत्ता पक्ष के सदस्यों ने जमकर विरोध किया, जिससे सदन में कई बार शोर-शराबा हुआ। विपक्ष का तर्क है कि सरकार जनगणना और परिसीमन की शर्तों के जरिए महिला आरक्षण को भविष्य के लिए टाल रही है, जबकि सरकार इसे अपनी बड़ी उपलब्धि के तौर पर पेश कर रही है। समाचार लिखे जाने तक विधेयक पर चर्चा जारी थी और देश की नजरें आगामी मतदान के परिणामों पर टिकी हुई हैं।

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