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हरीश रावत के आवास पर ‘तरबूज-खरबूज पार्टी’: खीरे और रागी के साथ चखाया सियासत का स्वाद, नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर दागे सवाल

देहरादून: उत्तराखंड की राजनीति में अपने अनूठे अंदाज के लिए मशहूर पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत ने एक बार फिर चर्चा बटोरी है। देहरादून की डिफेंस कॉलोनी स्थित अपने निजी आवास पर उन्होंने ग्रीष्मकालीन फलों—खीरा, खरबूजा और तरबूज के साथ-साथ पहाड़ी अनाज ‘रागी’ (मंडुआ) की एक विशेष पार्टी का आयोजन किया। इस आयोजन में खान-पान के साथ-साथ राजनीति का तड़का भी भरपूर लगा रहा, जहाँ रावत ने केंद्र सरकार की नीतियों पर जमकर निशाना साधा।

पहाड़ी स्वाद के साथ कूटनीतिक संदेश

हरीश रावत समय-समय पर उत्तराखंड के स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने के बहाने इस तरह के आयोजनों के माध्यम से अपनी राजनीतिक सक्रियता बनाए रखते हैं।

  • स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा: पार्टी में विशेष रूप से पहाड़ी खीरा और रागी से बने व्यंजनों को परोसा गया।
  • सियासी जमघट: इस दौरान भारी संख्या में उनके समर्थक और राजनीतिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे। चर्चा है कि इस आयोजन के जरिए रावत ने अपनी राजनीतिक जमीन को फिर से टटोलने और कार्यकर्ताओं में नया उत्साह भरने का प्रयास किया है।

नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर उठाए सवाल

आयोजन के दौरान मीडिया से मुखातिब होते हुए हरीश रावत ने केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023’ (महिला आरक्षण कानून) पर तीखी प्रतिक्रिया दी।

  • क्रियान्वयन पर संशय: उन्होंने सरकार द्वारा जारी हालिया नोटिफिकेशन पर सवाल उठाते हुए कहा कि केवल अधिसूचना जारी कर देना ही काफी नहीं है। उन्होंने सवाल किया कि यदि सरकार वास्तव में गंभीर है, तो इसे आगामी चुनावों से ही पूरी तरह प्रभावी क्यों नहीं किया जा रहा है।
  • विपक्ष का रुख: रावत ने आरोप लगाया कि सरकार आरक्षण के नाम पर महिलाओं को केवल भविष्य का सपना दिखा रही है, जबकि वास्तविक लाभ मिलने में अभी कई वर्षों का विलंब है।

सोशल मीडिया और जनसंपर्क का माध्यम

हरीश रावत ने इस ‘फ्रूट पार्टी’ की तस्वीरें साझा करते हुए संदेश दिया कि वे जनता और कार्यकर्ताओं के बीच हमेशा उपलब्ध हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि रावत की यह ‘तरबूज पार्टी’ महज एक खान-पान का कार्यक्रम नहीं थी, बल्कि आने वाले स्थानीय निकाय चुनाव और सांगठनिक मजबूती के लिए एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा थी।

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