नई दिल्ली। रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त कराने के प्रयासों में भारत ने अपनी भूमिका और सक्रिय कर दी है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने रविवार को कहा कि भारत अब केवल शांति और बातचीत की पैरवी तक सीमित नहीं है, बल्कि हाल के महीनों में रूस और यूक्रेन दोनों से सीधे बातचीत कर रहा है।
नई दिल्ली में आयोजित म्यूनिख लीडर्स मीटिंग में जयशंकर ने कहा कि भारत लंबे समय से युद्ध का समाधान बातचीत और कूटनीति के जरिए निकालने की वकालत करता रहा है। अब भारत ने इससे आगे बढ़कर दोनों पक्षों के साथ बातचीत शुरू की है और व्यावहारिक समाधान तलाशने में मदद की कोशिश कर रहा है।
काला सागर की सुरक्षा पर विशेष ध्यान
जयशंकर के अनुसार, भारत के प्रयासों की शुरुआत काला सागर में जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के मुद्दे से हुई है। इसके साथ ही अनाज और ऊर्जा के निर्यात से जुड़ी चिंताओं तथा संभावित हमलों को रोकने जैसे मुद्दों पर भी दोनों पक्षों से बातचीत चल रही है।
भारत का मानना है कि लंबे समय से जारी संघर्ष का स्थायी समाधान युद्ध के बजाय संवाद और कूटनीति से ही निकाला जा सकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी रूस और यूक्रेन के बीच शांति स्थापित करने के लिए लगातार बातचीत और कूटनीतिक प्रयासों पर जोर देते रहे हैं।
यूक्रेन ने भारत के प्रस्ताव को बताया व्यापक
इस बीच यूक्रेन के विदेश मंत्री आंद्री सिबिहा ने कहा है कि कीव को युद्धविराम के लिए चार देशों से प्रस्ताव मिले हैं, जिनमें भारत का प्रस्ताव सबसे व्यापक है। यूक्रेन ने ऊर्जा ढांचे और काला सागर में युद्धविराम जैसे विकल्पों पर विचार करने की इच्छा जताई है।
वहीं, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने हाल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा था कि मोदी के पास रूस-यूक्रेन संघर्ष के ऐसे समाधान को लेकर अच्छे विचार हैं, जो दोनों पक्षों को स्वीकार्य हो सकते हैं।
भारत की बढ़ती कूटनीतिक सक्रियता से रूस-यूक्रेन संघर्ष के समाधान की दिशा में नई उम्मीदें पैदा हुई हैं। हालांकि युद्ध समाप्त कराने के लिए आगे की बातचीत और दोनों पक्षों की सहमति महत्वपूर्ण होगी।





