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मोदी- शी जिनपिंग मुलाकात से पहले चीन का संदेश, मतभेदों को बातचीत से सुलझाने पर जोर

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की प्रस्तावित द्विपक्षीय मुलाकात से पहले बीजिंग ने भारत के साथ संबंधों को लेकर सकारात्मक संदेश दिया है। चीन ने कहा है कि दोनों देशों को रणनीतिक और दीर्घकालिक नजरिए से अपने संबंधों को देखना चाहिए तथा मतभेदों को उचित तरीके से संभालते हुए संवाद और सहयोग बढ़ाना चाहिए।

चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने कहा कि चीन भारत के साथ संबंधों को रणनीतिक और दीर्घकालिक दृष्टिकोण से आगे बढ़ाने, संचार एवं सहयोग मजबूत करने और मतभेदों को सही तरीके से प्रबंधित करने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच सहयोग और विकास के लिए बेहतर माहौल बनाना जरूरी है।

शी जिनपिंग 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाले 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने भारत आ रहे हैं। इस दौरान उनकी प्रधानमंत्री मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक होने की संभावना है। यह मुलाकात दोनों देशों के बीच संबंधों में आई ठंडक को कम करने के प्रयासों के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

भारत और चीन के संबंधों में पिछले कुछ वर्षों में सीमा विवाद के कारण तनाव रहा है। हालांकि, हाल के समय में दोनों देशों के बीच संवाद बढ़ा है। सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखने के साथ-साथ सीधी उड़ानों, वीजा और तीर्थयात्रा जैसे क्षेत्रों में भी धीरे-धीरे सहयोग बहाल हुआ है।

दोनों नेताओं की बातचीत में सीमा मुद्दे के अलावा व्यापार, निवेश, बाजार पहुंच, आर्थिक सहयोग और क्षेत्रीय एवं वैश्विक परिस्थितियों पर चर्चा हो सकती है। भारत लगातार कहता रहा है कि सीमा पर शांति और स्थिरता व्यापक द्विपक्षीय संबंधों के विकास के लिए जरूरी है।

बीजिंग में अगस्त में भारत और चीन के विशेष प्रतिनिधियों के बीच सीमा वार्ता का 25वां दौर भी हुआ था। इसमें सीमा प्रबंधन, सैन्य संचार तंत्र और सीमा विवाद के समाधान की दिशा में आगे बढ़ने पर सहमति बनी थी।

ऐसे में मोदी-जिनपिंग मुलाकात को दोनों देशों के बीच संबंधों को स्थिर करने और आगे की बातचीत का रास्ता मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

 

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