देहरादून: उत्तराखंड मदरसा शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के उस बयान का समर्थन किया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि सार्वजनिक स्थानों पर नमाज अदा करना उचित नहीं है। बोर्ड अध्यक्ष ने कहा कि सड़क, गलियों और सार्वजनिक मार्गों पर नमाज अदा करना शहरों में ट्रैफिक और सुरक्षा के लिहाज से समस्या पैदा करता है।
उन्होंने मीडिया से बातचीत में स्पष्ट किया कि धार्मिक गतिविधियों को सम्मान मिलना चाहिए, लेकिन इसे सार्वजनिक व्यवस्था के अनुरूप होना जरूरी है। अध्यक्ष ने कहा कि सभी धार्मिक संस्थानों को अपने परिसर में ही पूजा और नमाज का आयोजन करना चाहिए, ताकि आम लोगों को असुविधा न हो और कानून व्यवस्था बनी रहे।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में कहा था कि सार्वजनिक मार्गों पर नमाज अदा करने की परंपरा से यातायात और लोगों की दिनचर्या प्रभावित होती है। उनके इस बयान का उत्तराखंड मदरसा बोर्ड अध्यक्ष ने खुलकर समर्थन किया और इसे समाज के लिए जिम्मेदार कदम बताया।
विशेषज्ञों का कहना है कि सार्वजनिक स्थानों पर धार्मिक गतिविधियों को लेकर विवाद कई राज्यों में देखा गया है। ऐसे मामलों में प्रशासन का प्रयास रहता है कि धार्मिक आस्था और सार्वजनिक व्यवस्था दोनों संतुलित रहें। बोर्ड अध्यक्ष ने भी यही दृष्टिकोण अपनाते हुए कहा कि धर्म की स्वतंत्रता और सार्वजनिक अनुशासन में संतुलन होना जरूरी है।
उत्तराखंड में मदरसों की संख्या लगातार बढ़ रही है और बोर्ड का मुख्य उद्देश्य शिक्षा के साथ-साथ सामाजिक जिम्मेदारी भी सिखाना है। अध्यक्ष ने कहा कि मदरसों में पढ़ाई के साथ-साथ यह भी सिखाया जाता है कि समाज के नियमों का पालन करना सभी के लिए जरूरी है।
उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह के समर्थन से मुस्लिम समुदाय में भी जागरूकता बढ़ेगी और लोग स्वयं ही सार्वजनिक स्थानों पर नमाज अदा करने से बचेंगे। उनका कहना था कि धर्म और कानून के बीच तालमेल बनाए रखना समय की मांग है।
इस बयान के बाद उत्तराखंड में धार्मिक संस्थानों और प्रशासन के बीच संवाद और बढ़ सकता है। बोर्ड अध्यक्ष ने आशा जताई कि इससे शहरों में ट्रैफिक और सार्वजनिक सुरक्षा के मुद्दे कम होंगे और सभी नागरिकों के लिए सहूलियत बनी रहेगी।





