देहरादून।
उत्तराखंड की राजनीति में महिला आरक्षण के मुद्दे को लेकर नया घटनाक्रम सामने आया है। कांग्रेस से जुड़ी कई महिला नेताओं ने विपक्ष के रुख का विरोध करते हुए भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर ली। इस घटनाक्रम को आगामी राजनीतिक समीकरणों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
भाजपा नेताओं की मौजूदगी में आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुई महिला नेताओं ने आरोप लगाया कि कांग्रेस महिला आरक्षण के मुद्दे पर स्पष्ट और सकारात्मक भूमिका निभाने में असफल रही है। उनका कहना था कि महिलाओं को राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने के सवाल पर कांग्रेस की नीति विरोधाभासी रही है, जिससे कार्यकर्ताओं और महिला नेतृत्व में असंतोष पैदा हुआ।
भाजपा पदाधिकारियों ने इसे महिलाओं के सम्मान और सशक्तिकरण के पक्ष में उठाया गया कदम बताते हुए कहा कि केंद्र सरकार द्वारा लाए गए महिला आरक्षण प्रावधानों का देशभर में स्वागत हुआ है, जबकि विपक्ष ने इसे लेकर अनावश्यक राजनीतिक विरोध किया। पार्टी नेताओं का दावा रहा कि महिलाओं की बढ़ती भागीदारी भाजपा की नीतियों पर विश्वास का प्रमाण है।
दूसरी ओर कांग्रेस नेताओं ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि पार्टी हमेशा महिला आरक्षण के समर्थन में रही है और इसे लागू करने की मांग लगातार उठाती रही है। कांग्रेस का कहना है कि आरक्षण को अन्य प्रक्रियाओं से जोड़कर लागू करने में देरी की जा रही है, जिसका पार्टी विरोध कर रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि महिला आरक्षण का मुद्दा उत्तराखंड की राजनीति में प्रमुख चुनावी विमर्श बनता जा रहा है, जिसके चलते दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप और राजनीतिक पुनर्संरचना तेज होती दिखाई दे रही है।





