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मद्रास हाई कोर्ट ने अन्नाद्रमुक के छह विधायकों के इस्तीफे स्वीकारने का फैसला रखा बरकरार, चार पर अयोग्यता की तलवार

चेन्नई। मद्रास हाई कोर्ट ने तमिलनाडु विधानसभा अध्यक्ष जेसीडी प्रभाकर के अन्नाद्रमुक (AIADMK) के छह विधायकों के इस्तीफे स्वीकार करने के फैसले को बरकरार रखा है। अदालत ने कहा कि विधायकों के इस्तीफे स्वैच्छिक और वास्तविक थे। हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस्तीफे स्वीकार होने से दल-बदल कानून के तहत लंबित अयोग्यता की कार्यवाही समाप्त नहीं होगी। विधानसभा अध्यक्ष को संबंधित चार विधायकों के खिलाफ चल रही कार्यवाही दो महीने के भीतर पूरी करने का निर्देश दिया गया है। 

विजय की पार्टी TVK में शामिल हुए थे विधायक

मुख्य न्यायाधीश सुश्रुत अरविंद धर्माधिकारी और न्यायमूर्ति जी. अरुल मुरुगन की पीठ ने अन्नाद्रमुक के सचेतक एग्री एसएस कृष्णमूर्ति की याचिका पर यह फैसला सुनाया। याचिका में विधानसभा अध्यक्ष के निर्णय को चुनौती दी गई थी।

जिन छह विधायकों के इस्तीफे स्वीकार किए गए, वे बाद में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) में शामिल हो गए थे। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया था कि विधानसभा अध्यक्ष ने इस्तीफे स्वीकार करने से पहले पर्याप्त जांच नहीं की।

इस्तीफा और अयोग्यता की कार्यवाही अलग-अलग

हाई कोर्ट ने कहा कि विधायक का इस्तीफा स्वीकार करना और दल-बदल कानून के तहत उसकी अयोग्यता पर फैसला लेना दो अलग-अलग संवैधानिक प्रक्रियाएं हैं। अध्यक्ष को यह सुनिश्चित करना होता है कि इस्तीफा स्वेच्छा से दिया गया है और उस पर कोई दबाव नहीं है। इसके लिए राजनीतिक कारणों की विस्तृत जांच करना जरूरी नहीं है।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि इस्तीफा स्वीकार हो जाने के बावजूद अयोग्यता संबंधी लंबित याचिकाओं पर निर्णय लिया जाना आवश्यक है। कोर्ट ने विधानसभा अध्यक्ष को इन मामलों का निपटारा दो महीने में करने का निर्देश दिया।

चार विधायकों पर जारी रहेगी कार्यवाही

अदालत ने एस. जयकुमार, मरगाथम कुमारवेल, पी. सत्यबामा और एसाक्की सुब्बैया के खिलाफ अयोग्यता संबंधी याचिकाओं पर दो महीने के भीतर अंतिम फैसला सुनाने को कहा। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि इन मामलों में कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए कारण सहित निर्णय देना होगा।

इस फैसले से छह विधायकों के इस्तीफे स्वीकार करने के विधानसभा अध्यक्ष के निर्णय को न्यायिक मंजूरी मिल गई है, लेकिन चार विधायकों के खिलाफ दल-बदल से जुड़ी कार्यवाही का भविष्य अब विधानसभा अध्यक्ष के फैसले पर निर्भर करेगा।

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