नई दिल्ली। मध्य पूर्व में संघर्ष तेज होने के बीच यमन के हूती विद्रोहियों ने देश के तीसरे सबसे बड़े शहर तैज की घेराबंदी तेज कर दी है। दूसरी ओर, सऊदी अरब के खिलाफ मिसाइल और ड्रोन हमलों से क्षेत्रीय तनाव बढ़ गया है। तैज पर नियंत्रण को लेकर हूती विद्रोहियों और सऊदी समर्थित यमनी सरकारी बलों के बीच भीषण संघर्ष जारी है। शहर के आसपास लड़ाई बढ़ने से आम नागरिकों के सामने भोजन, ईंधन और दवाओं की कमी का खतरा पैदा हो गया है।
तैज का संपर्क कटने का खतरा
तैज यमन के दक्षिण-पश्चिमी हिस्से में स्थित एक महत्वपूर्ण शहर है। फिलहाल शहर पर यमन की सरकारी सेना का नियंत्रण है, लेकिन हूती विद्रोही आसपास के इलाकों में आगे बढ़ते हुए इसकी प्रमुख आपूर्ति मार्गों को बाधित करने की कोशिश कर रहे हैं। हाल के दिनों में आसपास के क्षेत्रों में लड़ाई तेज हुई है, जिससे शहर का सरकारी नियंत्रण वाले अन्य इलाकों से संपर्क प्रभावित होने की आशंका है।
तैज का सामरिक महत्व काफी अधिक है। इस पर कब्जा होने से हूती विद्रोहियों को यमन के दक्षिणी हिस्सों की ओर बढ़ने में मदद मिल सकती है। यही वजह है कि सरकारी बल शहर को बचाने के लिए कई मोर्चों पर संघर्ष कर रहे हैं।
खाद्य पदार्थों और ईंधन की किल्लत
घेराबंदी और लगातार गोलाबारी के कारण शहर में आम लोगों की मुश्किलें बढ़ रही हैं। आपूर्ति बाधित होने से खाद्य पदार्थों, पानी, रसोई गैस और डीजल की उपलब्धता प्रभावित हुई है। कीमतों में बढ़ोतरी के कारण कई परिवारों के लिए जरूरी सामान जुटाना मुश्किल हो रहा है।
अस्पतालों में दवाओं, चिकित्सा सामग्री और ईंधन की कमी को लेकर भी चिंता जताई गई है। लगातार हमलों के कारण नागरिकों के हताहत होने और लोगों के विस्थापित होने की खबरें सामने आई हैं। कई परिवार सुरक्षित स्थानों की तलाश में शहर छोड़ने को मजबूर हुए हैं।
रियाद पर हमलों से बढ़ा क्षेत्रीय तनाव
यमन में जमीनी संघर्ष के साथ हूती विद्रोहियों के सऊदी अरब पर मिसाइल और ड्रोन हमलों ने भी चिंता बढ़ाई है। रियाद और अन्य महत्वपूर्ण ठिकानों को निशाना बनाए जाने की खबरों के बीच हवाई सुरक्षा और विमान सेवाओं पर असर पड़ने की आशंका है। हालांकि, अलग-अलग हमलों में हुए नुकसान और हताहतों के आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।
गृहयुद्ध से पहले ही जूझ रहा यमन
यमन वर्ष 2014 से गृहयुद्ध और राजनीतिक अस्थिरता का सामना कर रहा है। लंबे संघर्ष ने देश की अर्थव्यवस्था, स्वास्थ्य सेवाओं और खाद्य आपूर्ति व्यवस्था को गंभीर नुकसान पहुंचाया है। तैज में नई सैन्य कार्रवाई से मानवीय संकट और गहरा होने की आशंका है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नागरिकों की सुरक्षा और राहत सामग्री की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग उठ रही है।





