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भारतीय कृषि पर ‘लू’ का काला साया: उत्पादन में 40% गिरावट की आशंका; UN की रिपोर्ट ने चावल की पैदावार और किसानों की सुरक्षा पर जताई चिंता

नई दिल्ली: विश्व पृथ्वी दिवस के अवसर पर संयुक्त राष्ट्र (UN) के खाद्य और कृषि संगठन (FAO) और विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) द्वारा जारी एक संयुक्त रिपोर्ट ने भारत की खाद्य सुरक्षा को लेकर खतरे की घंटी बजा दी है। रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि भीषण गर्मी और लू (Heatwave) न केवल भारतीय कृषि श्रमिकों के स्वास्थ्य के लिए घातक सिद्ध हो रही है, बल्कि यह देश के मुख्य खाद्यान्न ‘चावल’ के उत्पादन के लिए भी एक बड़ा खतरा बन गई है। विशेष रूप से गंगा और सिंधु नदी के मैदानी इलाकों में स्थित कृषि क्षेत्रों में फसल उत्पादन में 40 प्रतिशत से अधिक की भारी गिरावट आने का अनुमान जताया गया है।

प्रमुख कृषि क्षेत्रों पर संकट: गंगा-सिंधु के मैदान सबसे अधिक प्रभावित

रिपोर्ट के अनुसार, भारत के वे क्षेत्र जो कृषि की रीढ़ माने जाते हैं, वे अब जलवायु परिवर्तन की मार झेल रहे हैं।

  • अत्यधिक गर्मी का प्रभाव: गंगा और सिंधु नदी के आस-पास के विशाल कृषि क्षेत्रों में तापमान का स्तर सामान्य से बहुत ऊपर जा सकता है।
  • चावल उत्पादन पर मार: इन क्षेत्रों में चावल की खेती प्रमुखता से की जाती है, लेकिन अत्यधिक तापमान के कारण पौधों के विकास में बाधा आएगी, जिससे उत्पादन के आंकड़े गिर सकते हैं।

कृषि श्रमिकों की जान को खतरा

खाद्य और कृषि संगठन (FAO) ने रेखांकित किया है कि लू का असर केवल पौधों तक सीमित नहीं है।

  • श्रमिकों की कार्यक्षमता: खेतों में काम करने वाले लाखों मजदूरों और किसानों के लिए भीषण गर्मी में काम करना असंभव और जानलेवा हो रहा है।
  • मानवीय संकट: हीट स्ट्रेस (तापघात) के कारण कृषि कार्यों में देरी हो सकती है, जिसका सीधा असर फसल चक्र और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।

वर्ष 2022 की घटनाओं से मिली सीख

रिपोर्ट में भारत में साल 2022 में आई भीषण लू का विस्तृत विश्लेषण किया गया है, जिसने देश के एक-तिहाई से अधिक राज्यों को अपनी चपेट में लिया था।

  1. प्रभावित राज्य: पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र और हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों में अधिकतम और न्यूनतम तापमान में असामान्य बढ़ोतरी दर्ज की गई थी।
  2. विविध क्षेत्रों को नुकसान: उस वर्ष न केवल फसलों, बल्कि फलों, सब्जियों, पशुधन और मुर्गी पालन को भी भारी क्षति पहुँची थी। इसी अनुभव के आधार पर विशेषज्ञ इस साल और भी गंभीर परिणामों की आशंका जता रहे हैं।

मानसून में ‘सामान्य से कम’ बारिश का दोहरा झटका

एक ओर जहाँ गर्मी अपना रौद्र रूप दिखा रही है, वहीं दूसरी ओर मानसून को लेकर भी पूर्वानुमान सुखद नहीं हैं।

  • दोहरी मार: स्काईमेट और अन्य मौसम एजेंसियों के शुरुआती संकेतों के अनुसार, इस वर्ष मानसून में सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है।
  • सिंचाई की समस्या: बारिश की कमी और भीषण गर्मी मिलकर मिट्टी की नमी को खत्म कर देंगी, जिससे सिंचाई पर निर्भरता बढ़ेगी और लागत में इजाफा होगा।

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