नई दिल्ली: भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग में ईंधन नीति को लेकर नई पहल की जा रही है। ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI) ने घोषणा की है कि वह E25 ईंधन के मौजूदा पेट्रोल और डिज़ल वाहनों पर प्रभाव का व्यापक अध्ययन करेगा।
E25 ईंधन में 25% एथनॉल और 75% पेट्रोल होता है। सरकार ने पहले ही जैव–ईंधन के उपयोग को बढ़ावा देने की दिशा में कदम उठाए हैं, जिससे प्रदूषण कम हो और ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित हो। इस कदम का उद्देश्य भारत में ईंधन मिश्रण को बढ़ाकर देश को स्वच्छ और टिकाऊ ऊर्जा की ओर ले जाना है।
ARAI की यह जांच मौजूदा वाहनों की इंजन क्षमता, माइलेज, उत्सर्जन और अन्य तकनीकी पहलुओं पर केंद्रित होगी। अध्ययन से यह पता चलेगा कि E25 ईंधन पुराने वाहनों की परफॉर्मेंस या इंजन में किसी प्रकार की समस्या पैदा करता है या नहीं।
सड़कों पर चल रहे वाहनों में किसी भी तरह की तकनीकी समस्या या इंजन खराबी से बचाव के लिए यह अध्ययन महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह पहल वाहन मालिकों और उद्योग दोनों के लिए लाभकारी होगी, क्योंकि इससे नीति बनाने वाले सही आंकड़ों के आधार पर निर्णय ले सकेंगे।
सरकार ने पहले ही भारत में E20 ईंधन का उपयोग शुरू किया है, और अब E25 के विस्तार की योजना बनाई जा रही है। ARAI की रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की नीति और कार्ययोजना पर निर्णय लिया जाएगा।
इस संबंध में ARAI ने कहा है कि अध्ययन में विभिन्न प्रकार के वाहनों को शामिल किया जाएगा—छोटे, बड़े, पेट्रोल और हाइब्रिड वाहन। इसके साथ ही, उत्सर्जन और इंजन की दीर्घकालीन स्थायित्व पर भी ध्यान दिया जाएगा।
सरकार और ऑटोमोबाइल उद्योग का मानना है कि जैव–ईंधन का बढ़ता उपयोग न केवल पर्यावरण के लिए लाभकारी होगा, बल्कि विदेशी तेल पर निर्भरता को भी कम करेगा। इसके अलावा, किसानों और एथनॉल उत्पादन उद्योग को भी इससे लाभ मिलेगा।
ARAI के इस अध्ययन के बाद ही देश में E25 ईंधन को व्यापक स्तर पर लागू करने की योजना पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम भारत की “नेट–जीरो” उत्सर्जन नीति को पूरा करने में भी मदद करेगा।
इस पहल से यह स्पष्ट होता है कि भारत धीरे–धीरे पेट्रोल और डिज़ल पर निर्भरता कम करते हुए, पर्यावरण और तकनीकी स्थायित्व के संतुलन को ध्यान में रखते हुए नीतियाँ बना रहा है।





