नई दिल्ली। भारत और न्यूजीलैंड ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा देते हुए रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने पर सहमति जताई है। दोनों देशों के बीच व्यापार, रक्षा, समुद्री सुरक्षा और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। यह कदम क्षेत्रीय स्थिरता और आर्थिक साझेदारी को मजबूत करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
भारत की हिंद-प्रशांत नीति के तहत न्यूजीलैंड के साथ बढ़ती नजदीकियां क्षेत्रीय सहयोग के विस्तार का संकेत हैं। दोनों देश स्वतंत्र, खुले और नियम आधारित हिंद-प्रशांत क्षेत्र के समर्थन में अपनी साझी प्रतिबद्धता दोहरा चुके हैं।
रणनीतिक साझेदारी के तहत दोनों देशों के बीच रक्षा और समुद्री सुरक्षा सहयोग को बढ़ाने की योजना है। इसके अलावा व्यापार, निवेश, तकनीक, शिक्षा और आपूर्ति श्रृंखला जैसे क्षेत्रों में भी संबंधों को आगे बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों के बीच भारत और न्यूजीलैंड के बीच सहयोग का महत्व बढ़ गया है। दोनों देश समुद्री मार्गों की सुरक्षा, आर्थिक विकास और क्षेत्रीय संतुलन जैसे मुद्दों पर साझा हित रखते हैं।
भारत लगातार ऑस्ट्रेलिया, जापान, न्यूजीलैंड और अन्य साझेदार देशों के साथ आर्थिक एवं रणनीतिक संबंधों को मजबूत कर रहा है। नई साझेदारियां आपूर्ति श्रृंखला को अधिक मजबूत बनाने और क्षेत्रीय व्यापार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं।
न्यूजीलैंड के साथ संबंधों में यह प्रगति ऐसे समय में हुई है जब भारत हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अपनी भूमिका को और व्यापक कर रहा है। दोनों देशों के बीच बढ़ता सहयोग आने वाले वर्षों में व्यापार और सुरक्षा संबंधों को नई ऊंचाई दे सकता है।
भारत और न्यूजीलैंड की नई रणनीतिक साझेदारी को दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे लोकतांत्रिक मूल्यों, लोगों के बीच संपर्क और साझा क्षेत्रीय हितों का परिणाम माना जा रहा है।





