नई दिल्ली: विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने रूस के तेल पर पश्चिम द्वारा अपनाई जा रही नीति को लेकर कड़ी आलोचना की है। उन्होंने यूरोपीय देशों के दावे और उनके वास्तविक कदमों के बीच स्पष्ट असंगति की ओर ध्यान दिलाया। जयशंकर ने कहा कि रूस पर प्रतिबंध लगाने की कोशिशों के बावजूद कुछ यूरोपीय देश रूस से तेल खरीदना जारी रखे हुए हैं, जो अंतरराष्ट्रीय नीति और नैतिकता के दृष्टिकोण से उचित नहीं है।
जयशंकर ने यह भी बताया कि भारत हमेशा अंतरराष्ट्रीय मामलों में संतुलित और न्यायपूर्ण दृष्टिकोण अपनाता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत के लिए राष्ट्रीय हित सर्वोपरि हैं, और अंतरराष्ट्रीय दबाव में आकर कोई भी निर्णय नहीं लिया जाएगा।
विदेश मंत्री ने यूरोपीय देशों पर तंज कसते हुए कहा कि उनकी आलोचनाएं और असली कार्यों में भारी अंतर है। उन्होंने उल्लेख किया कि कई पश्चिमी देश रूस से ऊर्जा आयात कर रहे हैं, जबकि सार्वजनिक रूप से वे इस पर कड़े प्रतिबंध लगाने की बात करते हैं। यह व्यवहार “दोहरी नीति” के रूप में देखा जा सकता है।
जयशंकर ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत रूस और पश्चिमी देशों दोनों के साथ अपने मजबूत संबंध बनाए रखना चाहता है। उन्होंने कहा कि वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता के मद्देनजर भारत को संतुलित दृष्टिकोण अपनाना पड़ता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जयशंकर की यह टिप्पणी अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की स्वतंत्र और संतुलित कूटनीति की ओर संकेत करती है। यह भारत के लिए यह संदेश भी है कि वह किसी भी वैश्विक दबाव में अपनी नीति बदलने वाला नहीं है।
विदेश मंत्रालय ने इस संबंध में स्पष्ट किया कि भारत का उद्देश्य वैश्विक मामलों में न्यायसंगत दृष्टिकोण बनाए रखना और सभी देशों के साथ पारस्परिक सम्मान के आधार पर संबंध रखना है।
नोट: जयशंकर की यह टिप्पणी रूस और पश्चिम के बीच ऊर्जा और कूटनीतिक मुद्दों पर बढ़ते तनाव के बीच आई है। उनका यह रुख भारत की अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में संतुलन और स्वतंत्रता की नीति को दर्शाता है।





