नई दिल्ली , भारत और कनाडा के बीच आर्थिक संबंधों को नई दिशा देने वाला बड़ा कदम सामने आया है। दोनों देशों ने व्यापार और ऊर्जा सहयोग को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण समझौते किए हैं। इस समझौते के तहत भारत को तेल, गैस और विशेष रूप से यूरेनियम की आपूर्ति में मदद मिलेगी, जिससे देश की ऊर्जा जरूरतों को दीर्घकालिक सुरक्षा मिलेगी।
जानकारी के अनुसार, भारत और कनाडा ने एक व्यापक आर्थिक साझेदारी (CEPA) समझौते को जल्द अंतिम रूप देने पर सहमति जताई है। इस समझौते का उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापार को बढ़ाकर वर्ष 2030 तक करीब 50 अरब डॉलर तक पहुंचाना है।
ऊर्जा क्षेत्र में सबसे अहम समझौता यूरेनियम आपूर्ति को लेकर हुआ है। कनाडा ने भारत को लंबे समय तक यूरेनियम सप्लाई करने पर सहमति जताई है, जिससे भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम को मजबूती मिलेगी। यह समझौता भारत की बढ़ती बिजली मांग और स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए किया गया है।
इसके अलावा दोनों देशों ने तेल, गैस और अन्य ऊर्जा संसाधनों के व्यापार को बढ़ाने पर भी जोर दिया है। कनाडा भारत के लिए एक महत्वपूर्ण ऊर्जा साझेदार के रूप में उभर रहा है, जिससे भारत अपनी ऊर्जा आपूर्ति को और विविध बना सकेगा।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह समझौता भारत–कनाडा संबंधों में एक नए दौर की शुरुआत है। इससे न केवल व्यापार बढ़ेगा, बल्कि ऊर्जा सुरक्षा, निवेश और तकनीकी सहयोग के नए अवसर भी खुलेंगे।
दोनों देशों ने यह भी संकेत दिया है कि भविष्य में रक्षा, प्रौद्योगिकी और महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में सहयोग और बढ़ाया जाएगा।
निष्कर्ष:
भारत–कनाडा समझौता ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक साझेदारी को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है, जिससे आने वाले वर्षों में दोनों देशों के संबंध और अधिक गहरे होने की उम्मीद है।





