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भारत-अमेरिका रक्षा, परमाणु ऊर्जा और एआई सहयोग होगा और मजबूत, भरोसेमंद सप्लाई चेन पर भी फोकस

वॉशिंगटन। भारत और अमेरिका ने रक्षा, असैन्य परमाणु ऊर्जा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) तथा उभरती प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में रणनीतिक सहयोग को और मजबूत बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई है। अमेरिका ने भारत को हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अपना प्रमुख रणनीतिक साझेदार बताते हुए दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग के साथ-साथ भरोसेमंद वैश्विक सप्लाई चेन विकसित करने पर विशेष जोर दिया है।

अमेरिकी विदेश विभाग के वरिष्ठ अधिकारी एस. पॉल कपूर ने कहा कि दोनों देशों के संबंध अब पारंपरिक रक्षा सहयोग से आगे बढ़कर असैन्य परमाणु ऊर्जा, विश्वसनीय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर, उन्नत प्रौद्योगिकी और आर्थिक सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों तक पहुंच चुके हैं। उनका कहना था कि बदलती वैश्विक परिस्थितियों में भारत और अमेरिका की साझेदारी पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।

उन्होंने कहा कि दोनों देश ऐसी मजबूत और सुरक्षित सप्लाई चेन विकसित करने की दिशा में काम कर रहे हैं, जिससे महत्वपूर्ण तकनीकों और आवश्यक संसाधनों की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके। साथ ही, विश्वसनीय एआई और नई तकनीकों के विकास में भी साझेदारी बढ़ाई जाएगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि रक्षा, परमाणु ऊर्जा और उन्नत तकनीक के क्षेत्रों में बढ़ता सहयोग न केवल दोनों देशों के रणनीतिक संबंधों को नई मजबूती देगा, बल्कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता, सुरक्षा और आर्थिक सहयोग को भी बढ़ावा देगा। यह साझेदारी वैश्विक तकनीकी और सुरक्षा चुनौतियों से निपटने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

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