मुंबई तट के पास महीनों से फंसे भारतीय नाविकों के मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए जहाज मालिकों को फटकार लगाई और 50 नाविकों को तत्काल रिहा करने का आदेश दिया।
क्या है पूरा मामला
तीन जहाज — MT Asphalt Star, MT Stellar Ruby और MT Al Jafzia — को कथित अवैध ईंधन और बिटुमेन ट्रांसफर के आरोप में मुंबई तट से लगभग 11 नॉटिकल मील दूर रोका गया था। कार्रवाई के बाद जहाज जब्त कर लिए गए, लेकिन इन जहाजों पर मौजूद भारतीय नाविक महीनों तक समुद्र में ही फंसे रहे।
नाविकों ने अदालत को बताया कि जहाज मालिकों ने उन्हें लगभग छोड़ ही दिया था —
- जनवरी से वेतन नहीं मिला
- भोजन सीमित था
- प्रतिदिन केवल लगभग 300 मिलीलीटर पानी दिया जा रहा था
हाईकोर्ट की तीखी टिप्पणी
न्यायमूर्ति रविंद्र गुघे और न्यायमूर्ति हितेन वेणगावकर की पीठ ने कहा कि जहाज मालिकों ने नाविकों के साथ अमानवीय व्यवहार किया। अदालत ने टिप्पणी की कि घरों में पालतू जानवरों को भी इससे बेहतर सुविधाएँ मिलती हैं।
अदालत ने स्पष्ट कहा:
- मानव जीवन को इस तरह खतरे में नहीं डाला जा सकता
- केवल व्यावसायिक हितों के लिए कर्मचारियों को समुद्र में कैद नहीं रखा जा सकता
- किसी नाविक को आपराधिक मामले में आरोपी भी नहीं बनाया गया था, इसलिए उन्हें रोके रखना गलत है
अदालत का आदेश
हैबियस कॉर्पस याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने सभी 50 नाविकों की तुरंत रिहाई का आदेश दिया। जब अदालत ने पूछा तो नाविकों ने जहाज पर वापस जाने से साफ इनकार कर दिया, जिसे अदालत ने स्वीकार किया।
मानवीय संदेश
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा —
“ज़िंदगी एक ही बार मिलती है, पैसा आता-जाता रहता है।”
इस टिप्पणी ने पूरे मामले को मानवीय अधिकारों के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण बना दिया





