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बुलेट ट्रेन के कलपुर्जों में आत्मनिर्भर बने भारत, संसदीय समिति ने रेलवे से मांगी योजना

नई दिल्ली। संसद की रेल संबंधी स्थायी समिति ने देश में बुलेट ट्रेन के कलपुर्जों के निर्माण में आत्मनिर्भरता बढ़ाने पर जोर दिया है। समिति ने रेल मंत्रालय से हाईस्पीड रेल के लिए स्वदेशी तकनीक और उपकरण विकसित करने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की विस्तृत जानकारी मांगी है। समिति ने अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञता का इस्तेमाल करते हुए प्रशिक्षण कार्यक्रमों को भी विस्तार देने की सिफारिश की है।

समिति की 10वीं रिपोर्ट 10 अगस्त 2026 को संसद में पेश की गई। इसमें मुंबई-अहमदाबाद हाईस्पीड रेल परियोजना समेत देश में प्रस्तावित भविष्य के हाईस्पीड रेल गलियारों की तैयारियों की समीक्षा की गई है। समिति ने दुनिया के उन देशों के सफल हाईस्पीड रेल नेटवर्क का व्यापक अध्ययन करने को भी कहा है, जहां ऐसी सेवाएं प्रभावी ढंग से संचालित हो रही हैं।

रेल मंत्रालय ने समिति को बताया कि जापान में निर्मित ई10 सीरीज शिंकानसेन की विस्तृत निर्माण संबंधी जानकारी उपलब्ध नहीं होने के कारण भारत में स्वदेशी बुलेट ट्रेन विकसित करने पर काम शुरू किया गया है। भारत में विकसित की जा रही इस ट्रेन को बी28 नाम दिया गया है और इसकी डिजाइन गति 280 किलोमीटर प्रति घंटा रखी गई है।

समिति ने बी28 ट्रेनसेट के इस्तेमाल के निर्णय का स्वागत किया है। योजना के मुताबिक मुंबई-अहमदाबाद हाईस्पीड रेल कॉरिडोर के सूरत-वापी के 97 किलोमीटर हिस्से पर अगस्त 2027 से भारत में निर्मित बुलेट ट्रेन चलाने की तैयारी है। 508 किलोमीटर लंबे पूरे कॉरिडोर का निर्माण फिलहाल जारी है।

समिति ने हाईस्पीड रेल प्रशिक्षण संस्थान, वडोदरा में अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों की मदद से प्रशिक्षण क्षमता बढ़ाने और भारतीय कर्मियों के कौशल विकास पर भी जोर दिया है। साथ ही भविष्य में प्रस्तावित सात हाईस्पीड रेल कॉरिडोर के लिए सफल वैश्विक मॉडलों का अध्ययन करने को कहा गया है।

केंद्र ने बजट 2026-27 में मुंबई-पुणे, पुणे-हैदराबाद, हैदराबाद-बेंगलुरु, हैदराबाद-चेन्नई, चेन्नई-बेंगलुरु, दिल्ली-वाराणसी और वाराणसी-सिलीगुड़ी हाईस्पीड रेल कॉरिडोर की घोषणा की है। समिति का मानना है कि इन परियोजनाओं के लिए स्वदेशी तकनीक और मजबूत घरेलू विनिर्माण क्षमता विकसित करना दीर्घकालिक रूप से महत्वपूर्ण होगा।

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