नई दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने देश के बंदरगाहों की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने कहा कि बंदरगाहों की सुरक्षा का जिम्मा केवल लाइसेंस प्राप्त निजी सुरक्षा एजेंसियों को ही सौंपा जाए। साथ ही, इन एजेंसियों में तैनात सुरक्षा कर्मियों का केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) से प्रशिक्षित होना अनिवार्य होगा।
गृह मंत्री ने केंद्रीय बंदरगाह, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल के साथ ब्यूरो ऑफ पोर्ट सिक्योरिटी (बीओपीएस) की स्थापना की प्रगति की समीक्षा बैठक की। यह प्रस्तावित निकाय देश के बंदरगाहों और जहाजों की सुरक्षा से जुड़े नियामकीय एवं निरीक्षण संबंधी कार्यों की निगरानी करेगा।
बैठक में निर्णय लिया गया कि बंदरगाहों की सुरक्षा व्यवस्था में पेशेवर मानकों को सुनिश्चित करने के लिए केवल अधिकृत सुरक्षा एजेंसियों को ही नियुक्त किया जाएगा। इसके अलावा, निजी सुरक्षा गार्डों को तैनाती से पहले सीआईएसएफ द्वारा निर्धारित प्रशिक्षण प्राप्त करना होगा, ताकि सभी बंदरगाहों पर सुरक्षा के एक समान मानक लागू किए जा सकें।
सरकार का मानना है कि बढ़ते समुद्री व्यापार और रणनीतिक महत्व को देखते हुए बंदरगाहों की सुरक्षा को आधुनिक और सुदृढ़ बनाना आवश्यक है। इसी उद्देश्य से ब्यूरो ऑफ पोर्ट सिक्योरिटी की स्थापना की जा रही है, जो सुरक्षा मानकों के अनुपालन, निरीक्षण और समन्वय की जिम्मेदारी संभालेगा।
समीक्षा बैठक में सुरक्षा ढांचे को अधिक प्रभावी बनाने, विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने तथा आधुनिक सुरक्षा प्रणाली अपनाने पर भी जोर दिया गया। सरकार का उद्देश्य देश के सभी प्रमुख बंदरगाहों पर अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप सुरक्षा व्यवस्था विकसित करना है, जिससे समुद्री अवसंरचना और व्यापारिक गतिविधियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।





