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देश के 104 हवाईअड्डे अब 100% नवीकरणीय ऊर्जा से संचालित, ग्रीन एविएशन की ओर बढ़ा भारत

नई दिल्ली। भारत के विमानन क्षेत्र ने हरित ऊर्जा की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। देश के 104 हवाईअड्डे अब पूरी तरह नवीकरणीय ऊर्जा से संचालित हो रहे हैं। नागरिक उड्डयन मंत्रालय के अनुसार, इन हवाईअड्डों की बिजली जरूरतें सौर ऊर्जा और अन्य हरित ऊर्जा स्रोतों के माध्यम से पूरी की जा रही हैं।

केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री ने इस उपलब्धि को भारत के सतत विकास और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि देश 2070 तक नेट जीरो उत्सर्जन के लक्ष्य की ओर लगातार आगे बढ़ रहा है।

इन 104 हवाईअड्डों में कई प्रमुख एयरपोर्ट शामिल हैं, जहां बिजली की जरूरतों को पूरा करने के लिए ऑन-साइट सोलर पावर प्लांट लगाए गए हैं या फिर लंबी अवधि के समझौतों के जरिए हरित बिजली खरीदी जा रही है। इससे पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता कम करने और कार्बन उत्सर्जन घटाने में मदद मिल रही है।

भारत में हवाईअड्डों को पर्यावरण अनुकूल बनाने की पहल पिछले कुछ वर्षों में तेज हुई है। वर्ष 2015 में कोचीन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा दुनिया का पहला पूरी तरह सौर ऊर्जा से संचालित हवाईअड्डा बना था। इसके बाद कई अन्य हवाईअड्डों ने भी सौर ऊर्जा और ऊर्जा दक्षता से जुड़े उपाय अपनाए।

सरकार और हवाईअड्डा संचालक ऊर्जा बचत के लिए एलईडी लाइटिंग, ऊर्जा दक्ष उपकरणों, इलेक्ट्रिक वाहनों और ग्रीन बिल्डिंग मानकों जैसे उपायों को भी बढ़ावा दे रहे हैं। इन पहलों का उद्देश्य विमानन क्षेत्र के कार्बन फुटप्रिंट को कम करना है।

नागरिक उड्डयन क्षेत्र में बढ़ते यात्री यातायात के बीच हरित ऊर्जा का इस्तेमाल पर्यावरणीय चुनौतियों से निपटने के लिए अहम माना जा रहा है। सरकार का लक्ष्य आने वाले वर्षों में सभी भारतीय हवाईअड्डों को अधिक टिकाऊ और कम उत्सर्जन वाले बुनियादी ढांचे में बदलना है।

विशेषज्ञों के अनुसार, हवाईअड्डों का नवीकरणीय ऊर्जा की ओर बढ़ना न केवल पर्यावरण संरक्षण में योगदान देगा, बल्कि लंबे समय में ऊर्जा लागत को नियंत्रित करने में भी सहायक हो सकता है।

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