नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारत की स्वदेशी लंबी दूरी की वायु रक्षा प्रणाली ‘प्रोजेक्ट कुशा’ को देश की सुरक्षा व्यवस्था के लिए एक बड़ा ‘गेम-चेंजर’ बताया है। उन्होंने कहा कि यह प्रणाली भारत की वायु रक्षा क्षमता को नई मजबूती देगी और भविष्य के युद्धों में निर्णायक भूमिका निभाएगी।
रक्षा मंत्री ने यह बयान एक रक्षा कार्यक्रम के दौरान दिया, जहां उन्होंने कहा कि बदलते वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य में भारत को ऐसी आधुनिक और स्वदेशी तकनीकों की आवश्यकता है जो किसी भी हवाई खतरे का प्रभावी ढंग से मुकाबला कर सकें। उन्होंने प्रोजेक्ट कुशा को रूस से प्राप्त S-400 एयर डिफेंस सिस्टम का एक सक्षम और किफायती भारतीय विकल्प बताया।
जानकारी के अनुसार, प्रोजेक्ट कुशा का विकास रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) द्वारा किया जा रहा है। यह एक लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली (Long Range Surface-to-Air Missile System) है, जिसे देश की मल्टी-लेयर एयर डिफेंस संरचना का हिस्सा बनाया जाएगा।
इस प्रणाली में तीन प्रकार की इंटरसेप्टर मिसाइलें शामिल होंगी, जिनकी मारक क्षमता लगभग 150 किलोमीटर से लेकर 400 किलोमीटर तक होगी। इसे आधुनिक युद्ध की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया जा रहा है, ताकि यह फाइटर जेट, ड्रोन, क्रूज मिसाइल और बैलिस्टिक मिसाइल जैसे हवाई खतरों को नष्ट कर सके।
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, यह प्रणाली भारत की ‘आत्मनिर्भर भारत’ रक्षा नीति की दिशा में एक बड़ा कदम है। इससे देश को विदेशी रक्षा प्रणालियों पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी और स्वदेशी उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा।
रक्षा मंत्री ने यह भी कहा कि आधुनिक युद्ध तेजी से तकनीकी रूप ले रहा है, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और एडवांस्ड सेंसर जैसी तकनीकों की भूमिका बढ़ रही है। ऐसे में प्रोजेक्ट कुशा भारत की सुरक्षा ढाल को और मजबूत करेगा।
सरकार का मानना है कि आने वाले वर्षों में यह प्रणाली भारतीय वायुसेना और नौसेना की रक्षा क्षमता को नई ऊंचाई पर ले जाएगी और देश की सुरक्षा को अधिक सशक्त बनाएगी।





