नई दिल्ली। पहलगाम आतंकी हमले के मास्टरमाइंड में शामिल और घोषित आतंकवादी सैफुल्लाह कसूरी ने पाकिस्तान में एक बार फिर भड़काऊ बयान दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, कसूरी ने इजरायल विरोधी बयानबाजी के जरिए लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के लिए समर्थन जुटाने और युवाओं को संगठन से जोड़ने की कोशिश की है।
पिछले सप्ताह आयोजित खत्म-ए-नबुवत कॉन्फ्रेंस में भाषण के दौरान कसूरी ने दावा किया कि पाकिस्तानी सेना सऊदी अरब के पवित्र स्थलों की रक्षा करेगी और इजरायल को दुनिया के नक्शे से मिटा देगी। उसके बयान को क्षेत्रीय तनाव के बीच उकसावे वाली बयानबाजी के तौर पर देखा जा रहा है।
फंड जुटाने और भर्ती में सक्रिय
रिपोर्ट के अनुसार, लश्कर-ए-तैयबा का डिप्टी चीफ कसूरी पहलगाम हमले के बाद से पाकिस्तान में आयोजित सार्वजनिक कार्यक्रमों में लगातार नजर आ रहा है। आरोप है कि वह इन कार्यक्रमों के जरिए संगठन के लिए फंड जुटाने और युवाओं की भर्ती का प्रयास कर रहा है। लश्कर समर्थक सोशल मीडिया अकाउंट्स पर सामने आए वीडियो और तस्वीरों में उसे हथियारबंद सुरक्षाकर्मियों के बीच देखा गया है।
हमास से संपर्क का भी जिक्र
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पिछले एक वर्ष के दौरान पाकिस्तान में लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद के वरिष्ठ सदस्यों तथा हमास के कुछ वरिष्ठ नेताओं के बीच बैठकें हुई हैं। पिछले वर्ष हमास की एक टीम के बहावलपुर में जैश-ए-मोहम्मद के ठिकाने और पाकिस्तानी सेना के एक प्रतिष्ठान का दौरा करने का भी उल्लेख किया गया है।
कसूरी ने इससे पहले भी अब्राहम समझौते का विरोध किया है। मई में लाहौर की एक रैली में उसने कथित तौर पर कहा था कि कश्मीर हमले के बाद उसकी पहचान और लोकप्रियता बढ़ी है।
भारत की जांच एजेंसियां कसूरी को पहलगाम हमले से जुड़े प्रमुख आरोपियों में मानती हैं। सितंबर में जम्मू की विशेष एनआईए अदालत ने उसके खिलाफ गैर-जमानती वारंट भी जारी किया था।





