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न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर कांग्रेस को भाजपा का जवाब, यूपीए शासनकाल की नियुक्तियों पर उठाए सवाल

नई दिल्ली। न्यायपालिका की स्वतंत्रता को लेकर कांग्रेस की ओर से उठाए गए सवालों पर भाजपा ने पलटवार करते हुए उसके यूपीए शासनकाल को निशाने पर लिया है। भाजपा ने कांग्रेस से पूछा कि जब वह मौजूदा सरकार के कार्यकाल में न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर सवाल उठा रही है, तो उसे अपने शासनकाल में न्यायाधीशों की नियुक्तियों से जुड़े आरोपों पर भी जवाब देना चाहिए।

भाजपा के राज्यसभा सदस्य और प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने सोमवार को कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कांग्रेस को बिना आधिकारिक दस्तावेजों के आरोप लगाने से बचना चाहिए। उन्होंने यूपीए सरकार के दौरान न्यायाधीशों की नियुक्तियों में तत्कालीन कांग्रेस नेतृत्व की कथित भूमिका का मुद्दा उठाया।

सोनिया गांधी और अहमद पटेल की भूमिका पर सवाल

त्रिवेदी ने आरोप लगाया कि यूपीए शासन के दौरान न्यायाधीशों की नियुक्तियों के लिए नामों पर विचार करने की प्रक्रिया में तत्कालीन कांग्रेस नेता अहमद पटेल और सोनिया गांधी की भूमिका होने की चर्चा होती थी। उन्होंने सवाल किया कि इन नेताओं के पास ऐसा कौन-सा संवैधानिक पद था, जिसके आधार पर वे न्यायिक नियुक्तियों से जुड़ी प्रक्रिया में भूमिका निभाते।

भाजपा नेता ने कांग्रेस से अपने शासनकाल में न्यायपालिका से जुड़े फैसलों और नियुक्तियों पर स्थिति स्पष्ट करने को कहा। उन्होंने न्यायपालिका में नियुक्तियों को लेकर कांग्रेस के मौजूदा रुख पर भी सवाल उठाए।

पूर्व मुख्य न्यायाधीश की किताब से शुरू हुआ विवाद

दरअसल, कांग्रेस ने पूर्व सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजय किशन कौल के आगामी संस्मरण विदाउट फियर ऑफ फेवर की पांडुलिपि में सामने आई बातों का हवाला देते हुए मोदी सरकार के कार्यकाल में न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर चिंता जताई थी।

जयराम रमेश ने आरोप लगाया था कि न्यायाधीशों की नियुक्तियों में सरकार की भूमिका और संवेदनशील मामलों की सुनवाई करने वाली पीठों में बदलाव जैसे मुद्दे गंभीर सवाल खड़े करते हैं। कांग्रेस का कहना है कि संविधान की रक्षा करने वाली संस्था को सत्ताधारी पक्ष के दबाव से मुक्त रहना चाहिए।

भाजपा ने इन आरोपों के जवाब में कांग्रेस के पूर्व शासनकाल का हवाला देते हुए उससे अपने कार्यकाल की नियुक्ति प्रक्रिया पर स्पष्टीकरण मांगा है। इस मुद्दे पर दोनों दलों के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं।

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