हरिद्वार। उत्तराखंड पुलिस के एक निलंबित सिपाही के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन में शामिल होने के बाद मामला चर्चा में आ गया है। आरोप है कि इस सिपाही के संबंध कुछ संदिग्ध लोगों और गैंगस्टर नेटवर्क से जुड़े हो सकते हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने जांच तेज कर दी है।
जानकारी के अनुसार, हरिद्वार में तैनात रहे उक्त सिपाही को पहले ही विभागीय कारणों से निलंबित किया जा चुका है। हाल ही में उसे दिल्ली के जंतर-मंतर पर आयोजित एक प्रदर्शन के दौरान देखा गया। इसके बाद पुलिस और खुफिया एजेंसियों ने उसकी गतिविधियों को लेकर जानकारी जुटानी शुरू की।
STF अधिकारियों के अनुसार, जांच का मुख्य बिंदु यह पता लगाना है कि निलंबित सिपाही के किसी आपराधिक गिरोह या गैंगस्टर से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष संबंध हैं या नहीं। इसके लिए उसके संपर्कों, मोबाइल रिकॉर्ड, सोशल मीडिया गतिविधियों और अन्य संबंधित जानकारियों की जांच की जा रही है।
सूत्रों के मुताबिक, जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि क्या सिपाही ने अपने पद पर रहते हुए किसी संदिग्ध व्यक्ति की मदद की थी या किसी गैरकानूनी गतिविधि में उसकी भूमिका रही है। हालांकि, जांच पूरी होने से पहले अधिकारियों ने किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से इनकार किया है।
पुलिस विभाग का कहना है कि किसी भी कर्मचारी के खिलाफ आपराधिक गतिविधियों में संलिप्तता के प्रमाण मिलने पर नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी। विभाग अपने स्तर पर भी मामले की समीक्षा कर रहा है।
STF ने मामले में आगे की जांच जारी रखते हुए संबंधित लोगों से पूछताछ शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
इस पूरे मामले ने पुलिस विभाग में अनुशासन और कर्मचारियों की संदिग्ध गतिविधियों पर निगरानी को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा कि निलंबित सिपाही के खिलाफ लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है।





